The Congress as I see does not Belong to me or to you, but it belongs to the whole Country

भारतीय राजनीति में युवा चेहरे के रूप में राहुल गांधी एक बार फिर भारत जोड़ो न्याय यात्रा के माध्यम से सुर्खियों में है। इस साल के 14 जनवरी को उन्होंने मणिपुर के थौबल से इसकी शुरुआत की और 20 मार्च को इसका समापन मुंबई में होगा। हालांकि पिछली बार के विपरीत यात्रा पूरी तरह से पैदल नहीं होगी।

19 जून 1970 को जन्मे राहुल को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता राजीव गांधी, दादी इंदिरा गांधी एवं परनाना जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागडोर संभाली और उसे नए ऊँचाइयों तक पहुँचाया। वे नेहरू-गांधी परिवार की चौथी पीढ़ी के राजनेता है।

दो भाई बहनों में वे बड़े हैं। इनकी बहन प्रियंका गांधी भी राजनीति में सक्रिय हैं।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा संत स्टीफन्स कॉलेज से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने लंदन में एक प्रबंधन परामर्श व्यवसाय मॉनिटर ग्रुप के लिए काम किया। उसके बाद वर्ष 2002 में वह मुंबई स्थित प्रौद्योगिकी आउटसोर्सिंग फर्म के कई निदेशकों में से एक थे। इसी दौरान उनका झुकाव राजनीति की तरफ होने लगा।
It is the time to move ahead and bring the change
वर्ष 2004 में वे पूरी तरह से राजनीति में आ गये। उन्होंने अपनी मां और तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ राजनीतिक बैठकों में हिस्सा लेने लगे। उन्होंने अपनी मां के संसदीय क्षेत्र अमेठी में भी जाने लगे। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अमेठी सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ सक्रिय राजनीति में शामिल हो गए।

वे वर्तमान में केरल की वायनाड सीट से सांसद हैं। वर्ष 2006 में उन्होंने अपनी बहन के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव का प्रचार किया था जिसके कारण उनके पार्टी को लोकसभा में अच्छा खासा सफलता भी प्राप्त हुई थी, जिसके कारण केंद्र में उनकी सरकार भी बनी थी I वर्ष 2007 में इन्हें भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ और पार्टी के युवा संघ के सचिव बने। वर्ष 2008 में इन्होंने पार्टी में 40 नए युवाओं को समृद्ध किया, जो विभिन्न क्षेत्रों में महारत हासिल करते थे I

उनकी गिनती भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शीर्ष नेताओं में होती है। राजनीति में कुशलता का सबूत देने की वजह से उन्हें वर्ष 2013 में पार्टी के उपाध्यक्ष के रूप में कमान संभाली और पार्टी में नई ऊंचाइयों की दिशा में काम किया। उन्होंने अपनी नेतृत्व कौशल और विचारशीलता के साथ पार्टी को सशक्त करने का कार्य किया और युवा पीढ़ी को सकारात्मक रूप से शामिल करने के लिए प्रेरित भी किया। वर्ष 2017 में उन्हें विपक्षी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चुना गया। उन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता और समझदारी से अपने पक्ष को एक विश्वसनीय और विकासशील दिशा में ले जाने का प्रयास किया। 52 साल के राहुल गांधी के हाथों में फिलहाल पूरी पार्टी की बागडोर है और पार्टी उन्हीं के इशारे पर चलती है।

बदलते समय के साथ उन्होंने खुद की पहचान राजनीति में एक नई ऊंचाई तक पहुंचने वाले युवा नेता के रूप में बना रहे हैं। अपने सकारात्मक दृष्टिकोण से वे देश को नए सपनों और उम्मीदों की ओर बढ़ने का मार्ग दिखा रहे हैं।

वह अपनी पार्टी को आगामी चुनावों के लिए तैयार करने के लिए बहुत मेहनत कर रहे हैं और वह अब पार्टी के सदस्यों के साथ और भी अधिक निकटता से काम कर रहे हैं। अब यह देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि वह जो मेहनत कर रहे हैं, उसका परिणाम आने वाले समय में पार्टी को किस रूप में मिलता है। राजनीति उन्हें भले ही विरासत में मिली हो, लेकिन उनका स्वभाव और आचरण काफी सहज सरल है। उनमें किसी तरह का कोई घमंड नहीं दिखाई देता है। उन्होंने अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान इस बात का प्रमाण भी दिया है। इस कदम से उनकी छवि में भी पहले से सुधार आया है।

It doesn’t matter how much wisdom you have. If you don’t have position, you have nothing, That’s the tragedy of India.
