इस्लामी कानून के तहत महिलाओं के अधिकारों का होगा सम्मान : जबीउल्ला मुजाहिद

अफगानिस्तान, काबुल:  तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने के बाद अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में इस्लामी कानून के तहत महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करने का वादा किया। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद ने कहा कि हमने विरोध करने वालों को माफी देने तथा सुरक्षित अफगानिस्तान सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाते हैं।

हमारे लड़ाके किसी से बदला नहीं लेना चाहते और सभी को माफी दे दी गई है। गौरतलब है कि वर्षों तक उसके द्वारा विद्रोहियों की ओर से गुपचुप तरीके से बयान जारी किए जाते रहे हैं। तालिबान के पिछले शासन (1990 के दशक के अंत में) के दौरान महिलाओं के जीवन और अधिकारों पर कड़ी पाबंदियां देखी गई थीं। ऐसे में तालिबान प्रवक्ता के इस बयान को काफी अहम माना जा रहा है।

मुजाहिद ने यह भी कहा कि तालिबान चाहता है कि निजी मीडिया स्वतंत्र रहे, लेकिन उसने इस बात को विशेष तौर पर रेखांकित किया कि पत्रकारों को देश के मूल्यों के खिलाफ काम नहीं करना चाहिए। उन्होंने वादा किया कि विद्रोही (तालिबान) अफगानिस्तान को सुरक्षित कर लेंगे। साथ ही कहा कि जिन लोगों ने पिछली सरकार या विदेशी सरकारों या बलों के साथ काम किया उनसे वह कोई बदला नहीं लेना चाहते। तालिबान ने कहा कि वे अन्य देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंध चाहते हैं।

उन्होंने कहा हम विश्वास दिलाते हैं कि कोई भी उनके दरवाजे पर यह पूछने नहीं जाएगी कि उन्होंने मदद क्यों की। इससे पहले तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के सदस्य इमानुल्लाह समनगनी ने ऐसा ही वादा करते हुए कहा था कि तालिबान बिना विवरण दिए माफी का विस्तार करेगा और सरकार में शामिल होने के लिए महिलाओं को प्रोत्साहित करेगा।
प्रवक्ता ने इस बात पर भी जोर दिया कि अफगानिस्तान किसी दूसरे देश को निशाना बनाने के लिए अपनी जमीन के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देगा।

साल 2020 में अमेरिका के साथ हुए समझौते में तालिबान ने इसका वादा भी किया था। इस समझौते के बाद अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी का रास्ता साफ हो गया था।