असम, गुवाहाटी : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो भविष्य में इमारतों को बिना एयर कंडीशनिंग के भी ठंडा रखने में मददगार साबित होगी। संस्थान के स्कूल ऑफ एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग के प्रोफेसर पंकज कलिता और उनकी टीम ने ऊर्जा-कुशल ईंटें तैयार की हैं, जो प्राकृतिक रूप से कमरे के तापमान को कम रखने की क्षमता रखती हैं। इस शोध को प्रतिष्ठित ‘जर्नल ऑफ एनर्जी स्टोरेज’ में प्रकाशित किया गया है, जिसमें प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप प्राप्त शोधकर्ता भी शामिल हैं। आधुनिक वास्तुकला में गर्मियों के दौरान घरों को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में बिजली और एसी का उपयोग किया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है। इस चुनौती से निपटने के लिए शोधकर्ताओं ने फेज चेंज मैटेरियल्स (पीसीएम) का उपयोग किया है। ये ऐसे पदार्थ हैं जो पिघलते समय गर्मी को सोख लेते हैं और जमते समय उसे बाहर निकालते हैं। टीम ने विशेष रूप से ओएम35 नामक सामग्री और बायोचार का एक मिश्रण तैयार किया है, जिसे हल्के वजन वाली एएसी ईंटों के भीतर भरा गया है। यह तकनीक विशेष रूप से असम जैसे गर्म और आर्द्र क्षेत्रों के लिए प्रभावी है, जहां तापमान 28 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। कंप्यूटर सिमुलेशन और परीक्षणों के दौरान यह पाया गया कि इन विशेष ईंटों के उपयोग से अंदरूनी दीवारों के तापमान में लगभग 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आती है। इसके परिणामस्वरूप किसी भी इमारत की कूलिंग ऊर्जा खपत में 10 से 20 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। प्रो. कलिता के अनुसार ये ईंटें न केवल मजबूत हैं बल्कि आकार में भी स्थिर रहती हैं, जिससे निर्माण कार्य में इनका उपयोग करना बेहद आसान है। फिलहाल एक ईंट की अनुमानित लागत 115 से 130 रुपये के बीच है, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन होने पर इसकी कीमत कम होने की संभावना है। शोध दल अब इस नवाचार को व्यावसायिक स्तर पर लाने और एक स्टार्टअप शुरू करने की योजना बना रहा है, जो टिकाऊ शहरीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
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