असम, डिब्रूगढ़ : उल्फा (आई) के स्वयंभू मेजर जनरल अरुणोदय दोहोतिया उर्फ बिजित गोगोई और उनके निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) फ्रैंचिस असम ने अरुणाचल प्रदेश के पंगसौ दर्रे पर भारत-म्यांमार सीमा पर आत्मसमर्पण कर दिया। सुरक्षा सूत्रों ने पुष्टि की है कि दोनों ने क्षेत्र में तैनात असम राइफल्स के जवानों के सामने स्वेच्छा से आत्मसमर्पण किया। यह आत्मसमर्पण ऐसे समय में हुआ है, जब सुरक्षा बलों ने विद्रोही कैडरों की आवाजाही को रोकने और उल्फा-आई की शेष परिचालन क्षमताओं को बाधित करने के लिए भारत-म्यांमार सीमा पर अभियान तेज कर दिया है। दोहोतिया उल्फा-आई प्रमुख परेश बरुआ का करीबी सहयोगी और संगठन के सैन्य नेतृत्व का सदस्य है। वह गुट के संचार, जिनमें परेश बरुआ के ई-मेल और वीडियो क्लिप शामिल हैं, मीडिया घरानों को भेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। दोहोतिया असम पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण निशाना रहा है। वह कई प्रमुख उग्रवादी गतिविधियों में शामिल रहा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उसे 2023 और 2024 में पूर्वी असम के तिनसुकिया और जोरहाट जिलों में सेना के शिविरों पर ग्रेनेड हमलों की एक श्रृंखला के पीछे एक प्रमुख साजिशकर्ता के रूप में पहचाना है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण करने वाले शीर्ष उल्फा (आई) उग्रवादी अरुणोदय असोम को असम में ही रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि उग्रवादी को ऊपरी असम के तिनसुकिया में हिरासत में रखा जाएगा।
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