अरुणाचल प्रदेश, ईटानगर : अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के सदस्यों ने देश के अन्य हिस्सों में पूर्वोत्तर के लोगों के साथ होने वाली नस्लीय भेदभाव की घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा की। सदन ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर लगाम लगाने के लिए एक व्यापक और सख्त ‘नस्लवाद विरोधी कानून’ बनाने का आग्रह किया है। नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के विधायक थांगवांग वांगहम द्वारा अल्पकालिक चर्चा के दौरान इस मुद्दे को उठाया गया। उन्होंने हाल के कुछ गंभीर मामलों का हवाला देते हुए क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा पर चिंता जताई। 20 फरवरी को दिल्ली के मालवीय नगर में अरुणाचल की तीन महिलाओं के साथ किराए के मकान में एसी मरम्मत को लेकर हुए विवाद के बाद नस्लीय गाली-गलौज की गई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वांगहम ने 2014 के चर्चित मामले को याद दिलाया, जिसमें अरुणाचली युवक नीडो तानिया की दिल्ली के लाजपत नगर में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। यह बेहद अपमानजनक और असहनीय है। देश के अन्य हिस्सों में लोग अक्सर पूर्वोत्तर के इतिहास और देश के प्रति हमारे योगदान के बारे में कम जानकारी रखते हैं। सांसदों और विधायकों ने सुझाव दिया कि पूर्वोत्तर के इतिहास और संस्कृति को स्कूल के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए ताकि छात्रों में जागरूकता बढ़े। विधायक वांगहम ने पूर्वोत्तर के सभी सांसदों से इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर और संसद में मजबूती से उठाने की अपील की। चर्चा के दौरान यह रेखांकित किया गया कि अरुणाचल के लोग देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं और कई अनाम नायकों ने देश के लिए बलिदान दिया है।
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