बिहार, पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इस इस्तीफे की पुष्टि की। जदयू एमएलसी संजय गांधी ने नीतीश कुमार का इस्तीफा सभापति को सौंपा। राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद नियमों के मुताबिक उनके पास इस्तीफा देने के लिए 30 मार्च तक का ही समय था। नीतीश कुमार ने 5 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया था, जिसके बाद 16 मार्च को वह निर्विरोध निर्वाचित हुए। अब संभावना जताई जा रही है कि वह 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। उनके इस कदम के साथ ही बिहार में उनके 20 साल के शासन के अंत की अटकलें हकीकत में बदलती दिख रही हैं। हालांकि उनके उत्तराधिकारी को लेकर अभी सस्पेंस बना हुआ है। इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले जदयू के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री आवास पर बंद कमरे में लंबी बैठक की। पार्टी का एक वर्ग अभी भी चाहता है कि नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में सक्रिय रहें। इस बीच मंत्री श्रवण कुमार ने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा है कि भले ही उन्होंने सदन की सदस्यता छोड़ दी हो, लेकिन वह अगले छह महीनों तक मुख्यमंत्री के पद पर बने रह सकते हैं। फिलहाल सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बिहार की कमान अब किसके हाथों में होगी।
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