असम, गुवाहाटी : कांग्रेस के तीन निलंबित विधायकों कमलाख्या दे पुरकायस्थ, बसंत दास और शशि कांत दास ने आज गुवाहाटी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। इन नेताओं को प्रदेश मुख्यालय अटल बिहारी वाजपेयी भवन में राज्य अध्यक्ष दिलीप सैकिया की उपस्थिति में औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल किया गया। पार्टी में शामिल होने के बाद बोलते हुए पुरकायस्थ ने कहा कि यह निर्णय असम और देश की सुरक्षा तथा विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने कहा कि तीनों विधायक भाजपा की नीतियों के साथ काम करने और असम व भारत को आगे ले जाने में योगदान देने के लिए पार्टी में शामिल हुए हैं। पुरकायस्थ ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उसकी तुष्टीकरण की राजनीति ने पार्टी को कमजोर कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस ने भविष्य में अपनी विचारधारा नहीं बदली, तो वह खोखली हो सकती है। दास ने कहा कि उनका निर्णय असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में किए गए विकास कार्यों से प्रभावित है। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्तमान सरकार के तहत उनके निर्वाचन क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास हुआ है और वे मुख्यमंत्री के नेतृत्व में असम और देश की प्रगति के लिए काम करने हेतु भाजपा में शामिल हुए हैं।शशि कांत ने कहा कि वे असम के लोगों को एकजुट करने के सरमा के प्रयासों से प्रभावित थे, जिसने उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि कांग्रेस अब वह संगठन नहीं रही जो महात्मा गांधी के समय में थी, जब इसका गठन ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने के लिए किया गया था। गौरव गोगोई और उनके कथित पाकिस्तान संबंधों से जुड़े आरोपों पर टिप्पणी करते हुए दास ने दावा किया कि आगामी चुनावों में कांग्रेस को विपक्ष की योग्यता हासिल करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ सकता है और भविष्यवाणी की कि असम में भाजपा फिर से सत्ता में लौटेगी। यह घटनाक्रम राज्य में बढ़ती राजनीतिक हलचल के बीच हुआ है। कांग्रेस ने हाल ही में विधानसभा चुनावों के लिए 42 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची घोषित की है। आलोचनाओं का जवाब देते हुए असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने कहा कि उम्मीदवारों का चयन सावधानीपूर्वक किया गया है और पार्टी को चुनावों में मजबूत प्रदर्शन का भरोसा है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की सूची की आलोचना करते हुए आरोप लगाया था कि इसमें अधिकतर वंशवादी उम्मीदवार शामिल हैं, जबकि कांग्रेस नेतृत्व का दावा है कि सूची में जमीनी स्तर के नेता और अनुभवी राजनेता शामिल हैं। विधानसभा चुनावों से पहले तीन मौजूदा विधायकों का पाला बदलना असम में राजनीतिक मुकाबले को और तेज करने की उम्मीद है, क्योंकि सभी दल अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं।
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