नई दिल्ली : भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की अध्यक्ष पीटी उषा ने भारतीय खेलों के भविष्य को लेकर एक बड़ा विजन साझा किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को ऐसी नीतियों द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए, जो निर्णय लेने की प्रक्रिया में खिलाड़ियों को केंद्र में रखें। दिल्ली खेल पत्रकार संघ (डीएसजेए) द्वारा आयोजित भारतीय खेल पत्रकार संघ (एसजेएफआई) राष्ट्रीय सम्मेलन के स्वर्ण जयंती समारोह के तीसरे दिन उषा ने खेल प्रशासन में सुधार की वकालत की। उषा ने कहा एथलीट-फर्स्ट गवर्नेंस ही भारतीय खेलों के भविष्य का मार्गदर्शक होना चाहिए। खिलाड़ियों की तैयारी, कल्याण और विकास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। पिछले दशक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब बेहतर बुनियादी ढांचे, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और मजबूत संस्थागत सहायता के साथ वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास से प्रतिस्पर्धा कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की असली ताकत गांवों, कस्बों और स्कूलों में छिपी है। यदि कोचिंग और प्रतिभा पहचान में निवेश जारी रहा, तो भारत लगातार विश्व स्तरीय एथलीट तैयार कर सकता है। खेल पत्रकारों को कहानी सुनाने वाला बताते हुए उन्होंने कहा कि वे एथलीटों के संघर्ष और जीत को जनता तक पहुँचाकर खेल की नींव मजबूत करते हैं। इसी कार्यक्रम के दौरान एक पैनल चर्चा में आईओए के सीईओ रघुराम अय्यर ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा भारत वर्तमान में खेलों के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। हमारे पास महत्वाकांक्षा है और उन्हें पूरा करने के लिए निवेश और प्रयास भी किए जा रहे हैं। अय्यर ने भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत का लक्ष्य केवल पदक जीतना ही नहीं, बल्कि कॉमनवेल्थ गेम्स और भविष्य में ओलंपिक खेलों की मेजबानी करना भी है। उन्होंने बड़े अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों को बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा बताया।
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