मणिपुर, इंफाल : मणिपुर के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम ने मणिपुर विधानसभा में सूचित किया कि उग्रवादी संगठन यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) के साथ हस्ताक्षरित शांति समझौता पूरी तरह प्रभावी है। उन्होंने बताया कि अब तक संगठन के 1,435 कैडरों का अधिकारियों द्वारा सफलतापूर्वक सत्यापनmकिया जा चुका है।कांग्रेस विधायक सूरजकुमार ओकराम द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने सदन को समझौते की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। शांति समझौते की स्थिति: नवंबर 2023 में यूएनएलएफ (पाम्बेई गुट), भारत सरकार और मणिपुर सरकार के बीच हुआ यह ऐतिहासिक समझौता वर्तमान में सक्रिय है। सत्यापित किए गए सभी 1,435 कैडर वर्तमान में छह निर्धारित शिविरों में रह रहे हैं। सरकार द्वारा इन शिविरों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। केंद्र सरकार ने इन शिविरों के रखरखाव के लिए 5.83 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। यह राशि दिसंबर 2023 से अप्रैल 2024 की अवधि के लिए पांच किस्तों में जारी की जा रही है। मंत्री ने सदन को बताया कि मई 2024 से अक्टूबर 2024 तक के अगले छह महीनों के लिए धन जारी होना अभी बाकी है, जिसके बाद पिछले वित्तीय बकाया को साफ किया जाएगा। यूएनएलएफ के साथ यह समझौता मणिपुर के आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य में एक मील का पत्थर माना जाता है। यह पहला मेइतेई उग्रवादी समूह है, जिसने भारत सरकार के साथ औपचारिक शांति समझौता किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दशकों से चले आ रहे सशस्त्र विद्रोह को समाप्त करना और कैडरों को पुनर्वास के माध्यम से मुख्यधारा में वापस लाना है। सरकार की प्राथमिकता इन शिविरों की कड़ी निगरानी सुनिश्चित करना और कैडरों को सामाजिक-आर्थिक रूप से स्थिर बनाना है।
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