नगालैंड, कोहिमा : नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) ने शिक्षा संस्थानों और राज्य विधानसभा में देशभक्ति गीत वंदे मातरम को जबरन थोपने पर कड़ा विरोध जताया। पार्टी का कहना है कि इसे अनिवार्य बनाना नगालैंड की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए खतरा है। कोहिमा स्थित अपने केंद्रीय मुख्यालय से जारी किए गए एक अधिकृत बयान में कहा कि यह कदम राज्य की जनता के लिए अवांछित और शत्रुतापूर्ण है और भारत के संविधान के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन करता है। संविधान के अनुच्छेद 371ए के तहत विशेष संवैधानिक प्रावधान का भी हवाला दिया, जो नगालैंड के लोगों की धार्मिक और पारंपरिक प्रथाओं की रक्षा करता है। एनपीएफ के अनुसार गीत का अनिवार्य पाठ राज्य की ईसाई-बहुसंख्यक आबादी की अंतरात्मा और आस्था के विपरीत है। बयान में आगे कहा गया कि गीत में हिंदू देवियों का उल्लेख एकेश्वरवादी मान्यताओं और ईसा मसीह की शिक्षाओं के विपरीत है, जिससे राज्य के कई लोगों के लिए अनिवार्य पाठ को स्वीकार करना कठिन हो जाता है। हम इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से पुनर्विचार करने और देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप का सम्मान करते हुए यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि किसी भी समुदाय को अपनी धार्मिक मान्यताओं से समझौता करने के लिए मजबूर न किया जाए। एनपीएफ ने समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों और व्यक्तियों को राज्य की अनूठी पहचान, संस्कृति और आस्था की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान भी किया। उसने कहा कि क्षेत्रीय ताकतों में एकता नगालैंड के लोगों की आवाज को मजबूत करेगी।
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