असम, गुवाहाटी : केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने अंतर्देशीय जलमार्गों की सुरक्षा में सुधार के उद्देश्य के तहत ब्रह्मपुत्र पर राष्ट्रीय जलमार्ग-2 के किनारे बोगीबील, सिलघाट, पांडू और बिश्वनाथघाट में चार नए नदी आधारित प्रकाशस्तंभ की आधारशिला रखी। गुवाहाटी के लाचित घाट पर आयोजित इस समारोह का संयुक्त रूप से आयोजन प्रकाशस्तंभ और दीपपोत महानिदेशालय (डीजीएलएल) तथा भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) द्वारा पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तत्वावधान में किया गया। मालूम हो कि चारों प्रकाशस्तंभ, डिब्रूगढ़ के बोगीबील, कामरूप महानगर के पांडु, नगाँव जिले के सिलघाट (ये तीनों ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी तट पर स्थित हैं) तथा विश्वनाथ के विश्वनाथ घाट (जो उत्तरी तट पर स्थित एकमात्र स्थल है) पर ब्रह्मपुत्र (राष्ट्रीय जलमार्ग-2) के रणनीतिक बिंदुओं पर स्थित हैं। राष्ट्रीय जलमार्ग-2 भारत के सबसे महत्वपूर्ण अंतर्देशीय माल और यात्री परिवहन गलियारों में से एक है। इन चारों परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 84 करोड़ है। प्रत्येक प्रकाशस्तंभ की ऊंचाई लगभग 20 मीटर होगी, जिसकी भौगोलिक सीमा 14 नॉटिकल मील तथा प्रकाश सीमा 8-10 नॉटिकल मील होगी और इन्हें पूर्णतः सौर ऊर्जा से संचालित किया जाएगा। नौवहन अवसंरचना के साथ-साथ प्रत्येक स्थल पर संग्रहालय, एम्फीथिएटर, कैफेटेरिया, बच्चों के खेल क्षेत्र, स्मारिका दुकान और विकसित सार्वजनिक स्थल भी बनाए जाएंगे, जिससे ये लाइटहाउस नौवहन सुविधा के साथ-साथ पर्यटन के प्रमुख आकर्षण भी बनेंगे। इस मौके पर सोनोवाल ने कहा कि राष्ट्रीय जलमार्ग-2 पर नदी आधारित प्रकाशस्तंभ स्थापित करने का निर्णय ब्रह्मपुत्र जलमार्ग पर माल परिवहन में वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान दर्ज 53 प्रतिशत की वृद्धि को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर माल ढुलाई लगातार बढ़ रही है और ब्रह्मपुत्र कॉरिडोर अब असम के चाय, कोयला और उर्वरक उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसके साथ ही यह यात्री और पर्यटन परिवहन को भी गति दे रहा है। सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में अंतर्देशीय जलमार्ग केवल सड़क और रेल का विकल्प भर नहीं हैं, बल्कि उन्हें के रूप में विकसित किया जा रहा है। जलमार्ग से एक टन माल ढुलाई की लागत सड़क परिवहन की तुलना में बहुत कम होती है, कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है और इससे सड़कों पर यात्री तथा समय-संवेदनशील वस्तुओं के लिए अधिक स्थान उपलब्ध होता है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र पर बनने वाले ये प्रकाशस्तंभ इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि भारत की नदियां अब चौबीसों घंटे व्यापार और आवागमन के लिए तैयार हैं। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय जलमार्ग-2 पर यातायात बढ़ने के साथ पर्यावरणीय और यातायात प्रबंधन के लाभ भी बढ़ेंगे, उत्सर्जन में कमी आएगी, सड़कों पर दबाव घटेगा, दुर्घटनाओं का जोखिम कम होगा और पूर्वोत्तर के लिए एक अधिक सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला विकसित होगी। उन्होंने कहा कि प्रकाशस्तंभ रात्रि नौवहन को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाएंगे, जिससे चौबीसों घंटे जलमार्ग संचालन की दिशा में सबसे बड़ी बाधा दूर होगी।
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