पंजाब, चंडीगढ़ : पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बिना हाईकोर्ट की अनुमति के पेड़ों को काटने पर लगी रोक हटाने से इन्कार कर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में जान जाना गंभीर विषय है, लेकिन पर्यावरण का विनाश भी उतना ही बड़ा संकट है। हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या आप चाहते हैं कि आपके बच्चे और पोते-पोती जिंदा रहें या नहीं? मोहाली में प्रस्तावित राउंडअबाउट (गोलचक्कर) परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतंत्र आयोग का गठन कर दिया है। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी ने ट्रैफिक जाम, घातक सड़क दुर्घटनाओं की दलील देकर मोहाली के पीआर-7 रोड पर तीन राउंडअबाउट बनाने के लिए 251 पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी थी।अदालत ने मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए गठित आयोग में पंजाब के एडवोकेट जनरल, गमाडा, वन विभाग और याचिकाकर्ताओं के वकीलों को शामिल करने का आदेश दिया है। आयोग को चार दिन में स्थल का निरीक्षण कर अगली सुनवाई से पहले एक विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी। आयोग को आदेश दिया गया कि हर उस पेड़ का सटीक स्थान दर्शाने वाला नक्शा और बर्ड्स-आई व्यू तैयार करे, जिसे काटा जाना प्रस्तावित है। यह स्पष्ट रूप से बताए कि उनमें से कौन-कौन से पेड़ हेरिटेज यानी पीपल, बरगद और नीम जैसी दीर्घायु प्रजातियों के हैं तथा क्या उनकी कटाई वास्तव में जरूरी है। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल सरकारी मंजूरी होना काफी नहीं है, खासकर शहरी क्षेत्रों में पुराने पेड़ों के नुकसान का स्वतंत्र और न्यायिक मूल्यांकन जरूरी है।
पंचायत तकनीकी सहायक को रंगे हाथ गिरफ्तार
बिहार, मधुबनी : भ्रष्टाचारियों के खिलाफ निगरानी विभाग की टीम लगातार छापेमारी कर रही है। इसी कड़ी में एक बार...
Read more






