यूपी ने लाई अंतर्देशीय जलमार्ग विस्तार में तेजी
नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश की नदियों में जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। गोमती समेत प्रदेश की 10 नदियों में बोट और क्रूज चलाने के लिए मुंबई में चार कंपनियों के साथ एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन समझौतों से अब यूपी जल परिवहन प्राधिकरण के काम में तेजी आने की उम्मीद है। इंडियन रजिस्टर्ड ऑफ शिपिंग के साथ भी एमओयू हुआ है। कुल 850 करोड़ रुपये के एमओयू साइन किए गए हैं। कार्ययोजना पर काम शुरू हो चुका है। ये कंपनियां जल परिवहन से जुड़े विभिन्न कार्यों को अंजाम देंगी। जल परिवहन प्राधिकरण बुनियादी ढांचा तैयार करेगा, जिनमें वाराणसी में दो क्रिस्टल टर्मिनल, रीजनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक वैसल के लिए इलेक्ट्रिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और शिप रिपेयर फैसिलिटेट सेंटर शामिल हैं। पहले 11 नदियों को चुना गया था, लेकिन सई नदी में पानी की कमी के कारण अब 10 नदियों पर कार्ययोजना केंद्रित होगी। जल परिवहन के तहत जलयानों का रजिस्ट्रेशन आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) ही करेंगे। इसके लिए लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा और आगरा सहित 19 जिलों में रजिस्ट्री कार्यालय खोले जाएंगे। केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि ये समझौते भारत की अपनी नदी प्रणालियों के आधुनिकीकरण की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। ये समझौता ज्ञापन दर्शाते हैं कि कैसे अंतर्देशीय जलमार्ग विकास, पर्यटन और क्षेत्रीय एकीकरण के इंजन के रूप में उभर रहे हैं। सोनोवाल ने इस विकास को भारत के समुद्री भविष्य के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण बताया। स्वच्छ और सतत नदी गतिशीलता को बढ़ावा देने के लिए राज्य ने भारत के राष्ट्रीय हरित नौवहन मिशन और कम उत्सर्जन वाले नदी परिवहन के दृष्टिकोण के अनुरूप, इलेक्ट्रिक पोत चार्जिंग अवसंरचना के लिए एक परियोजना को मंजूरी दी। 100 करोड़ रुपये का समझौता ज्ञापन, जहाजों के लिए इलेक्ट्रिक चार्जिंग अवसंरचना को शुरू करने में सक्षम बनाएगा, जो राष्ट्रीय हरित नौवहन मिशन का समर्थन करेगा।
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