भारत और चीन के बीच हुई 13वें दौर की सैन्य वार्ता

नई दिल्ली : करीब दो महीने के बाद भारत और चीन के बीच 13वें दौर की कोर कमांडर स्तर की सैन्य वार्ता हुई। इसमें भारत ने पूर्वी लद्दाख में विवाद के बचे इलाकों से सैन्य टुकड़ियों को वापस कर जल्द से जल्द पूर्व स्थिति बहाल करने पर जोर दिया। बातचीत करीब 8 घंटे तक चली। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के चीनी हिस्से में मोल्दो बॉर्डर प्वाइंट पर ये बातचीत सुबह 10.30 बजे शुरू हुई और शाम 7 बजे तक चलती रही।

सैन्य सूत्रों के अनुसार वार्ता का मुख्य जोर पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 (पीपी-15) से सैन्य टुकड़ियों की वापसी पर केंद्रित रहा। बातचीत के बारे में कोई भी आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है। भारत की ओर से वार्ता की अगुआई लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन ने की, जो लेह स्थित 14वें कोर के कमांडर हैं। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि पूर्वी लद्दाख के देपसांग, हॉट स्प्रिंग और गोगरा के मुद्दों का सुलझना दोनों देशों के रिश्तों में सुधार के लिए जरूरी है।

सेना के सूत्रों के अनुसार भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत के दौरान देश का ये रुख पूरी दृढ़ता से चीन के सामने रखा है। दोनों देशों के बीच बातचीत का ताजा दौर विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत के तीन हफ्ते बाद शुरू हुआ है। दोनों मंत्री पूर्वी लद्दाख के बचे हुए मुद्दों के शीघ्र समाधान पर सहमत हुए थे। दोनों विदेश मंत्रियों की 16 सितंबर को दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक से इतर बातचीत हुई थी।

भारत-चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की 12वें दौर की बातचीत 31 जुलाई को हुई थी। इसके कुछ दिन बाद ही दोनों पक्षों ने गोगरा में सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया पूरी की थी और इसे क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया था।

चीन ने फिर की घुसपैठ की कोशिश :

करीब 10 दिन पहले दोनों देशों की टुकड़ियों के बीच अरुणाचल के तवांग के यांग्से में झड़प हुई और भारतीय सैनिकों ने घुसपैठ की कोशिश कर रहे चीनी सैनिकों को वापस जाने को मजबूर कर दिया। पिछले महीने चीनी सेना के करीब 100 जवानों ने उत्तराखंड के बाराहोती सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश की थी। घटना 30 अगस्त को हुई थी और चीनी सेना कुछ घंटे बाद खुद लौट गई थी।