अरुणाचल प्रदेश, ईटानगर : अरुणाचल प्रदेश में सांप काटने के मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर लापरवाही और अनियमितताएं का मामला सामने आया है। इस मामले की जमीनी हकीकत का जायजा लेने के लिए देश के अंधविश्वास विरोधी नेता, तर्कवादी विचारक, राष्ट्रीय मानवाधिकार और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. दिव्यज्योति सैकिया राज्य के सबसे बड़े चिकित्सालय टॉम रीबा इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज हॉस्पिटल (थ्रिम्स) पहुंचे। राजेन ग्यादी नाम के एक युवक को 17 जुलाई की भोर में एक सांप ने काट लिया और काटने के कुछ ही मिनटों बाद वह नाहरलागुन में टॉम रीबा मेडिकल कॉलेज (थ्रिम्स) पहुंचा। पहुंचने के बाद ड्यूटी पर मौजूद आपातकालीन डॉक्टरों ने एक खाली कागज के टुकड़े पर एक इंजेक्शन का नाम लिखा और उसे युवक को सौंप दिया क्योंकि सांप के काटने पर इस्तेमाल की जाने वाली जीवन रक्षक दवा, एंटी-स्नेक वेनम अस्पताल में उपलब्ध नहीं थी। पीड़ित के परिवार के सदस्यों ने देर रात नाहरलागुन से ईटानगर तक इंजेक्शन पाने के लिए संघर्ष किया और आखिरकार ईटानगर के रामकृष्ण मिशन अस्पताल परिसर से 3 हजार181 रुपये में पांच एंटी-स्नेक वेनम खरीदे और अस्पताल प्रबंधन को दिया। जब मानवाधिकार उल्लंघन की इस घटना की जानकारी राष्ट्रीय महासंघ मानव अधिकार परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय स्तर के मानवाधिकार और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. दिव्यज्योति सैकिया को मिली तो वह तुरंत गुवाहाटी से अरुणाचल प्रदेश के दुइमुख में पीड़िता से मिलने पहुंचे और घटना के विस्तृत जानकारी हासिल की।इसके बाद में वह अस्पताल पहुंचे और घटना के बारे में पूछे जाने पर मुख्य अधीक्षक दुखम रैना ने कहा कि घटना के दिन अस्पताल में स्टॉक में कोई जीवनरक्षक एंटी-स्नेक वेनम नहीं था और नीचे के कर्मचारियों ने उन्हें एंटी-स्नेक वेनम की अनुपस्थिति के बारे में सूचित नहीं किया था। डॉ. रैना ने कहा कि जिस सांप ने काटा था वह जहरीला नहीं था और अरुणाचल प्रदेश में सांप के काटने का इलाज करने के लिए कोई प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी नहीं हैं।अब सवाल यह है कि देश के हर छोटे-बड़े राज्य के अस्पतालों में एंटी-स्नेक वेनम का भंडारण करना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। लेकिन थ्रीम्स अस्पताल ने साँप-विरोधी जहर का भंडार क्यों नहीं किया? यदि डॉक्टरों ने कहा कि साँप विषहीन था, तो साँप-विरोधी जहर के पाँच इंजेक्शन क्यों दिए गए?सरकारी अस्पतालों में इतना इलाज उपलब्ध और मुफ्त होने के बावजूद मरीजों को परेशानी क्यों उठानी पड़ी? अस्पताल के डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ ऐसे आपातकालीन उपचार के लिए प्रशिक्षित क्यों नहीं हैं?अरुणाचल प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने प्रशिक्षण क्यों नहीं दिया? ये सवाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध और अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार विजेता, राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. दिब्यज्योति सैकिया ने उठाए हैं।उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेमा खांडू से इस संवेदनशील मुद्दे पर हस्तक्षेप करने और यह सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाने का आग्रह किया कि आने वाले दिनों में राज्य के आम नागरिकों को ऐसी अछूत स्थिति का सामना न करना पड़े।गौरतलब है कि असम सरकार सांप काटने के इलाज और अंधविश्वास के खिलाफ आम जनता में जागरूकता बढ़ाने और असम के लगभग सभी सरकारी अस्पतालों में सांप काटने पर किफायती इलाज उपलब्ध कराने की मांग करने वाले डॉ. दिव्यज्योति सैकिया एकमात्र मानवाधिकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
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