महाराष्ट्र, मुंबई। वर्ष 1993 में विशाखापत्तनम और मुंबई में स्थापित राष्ट्रीय महासंघ मानवाधिकार परिषद लंबे समय से देश के विभिन्न राज्यों में आम लोगों की सेवा कर रही है। इसकी स्थापना राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता बीजीएम श्रीनिवास रेड्डी ने की थी। इस राष्ट्रीय संगठन से शुरुआती दौर से जुड़े रहे और राष्ट्रीय स्तर पर असम का प्रतिनिधित्व करने वाले तर्कसंगत विचारक, प्रेरणादायक वक्ता, अंतर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कार विजेता, मानवाधिकार और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. दिव्यज्योति सैकिया को अब इसके वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। डॉ. सैकिया ने अपनी जिम्मेदारी संभालते हुए असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा को तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शर्मा के नेतृत्व वाली दिसपुर की भाजपा गठबंधन सरकार ने बेदखली के नाम पर कुछ लोगों पर अत्याचार कर मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है। इसलिए उन्होंने कहा कि मानवीय दृष्टिकोण से बेदखली केवल सरकारी जमीन पर ही की जानी चाहिए और सरकार से बेदखली से पहले बच्चों और महिलाओं के लिए भोजन और अस्थायी शिविर और पुनर्वास प्रदान करने का आग्रह किया। मालूम हो कि डॉ. सैकिया लंबे समय से असम और पूरे भारत में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने अंधविश्वास और जादू-टोने के नाम पर प्रताड़ित लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखकर मानव अधिकारों की रक्षा के लिए एक दुर्लभ उदाहरण पेश किया है। डॉ. सैकिया ने पिछले दिनों असम में पुलिस मुठभेड़ों के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर जोरदार आवाज उठाकर मानवाधिकारों की रक्षा में अग्रणी भूमिका निभाई है। अंधविश्वास और जादू-टोना के नाम पर हत्या और अत्याचार को रोकने के लिए राज्य में लागू असम विट्स हंटिंग पीपीपी अधिनियम 2015 को पारित करवाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सामाजिक और मानवाधिकार के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए एक सौ साठ से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने वाले डॉ. दिव्यज्योति सैकिया की भारत और दुनिया भर के कई प्रमुख मीडिया आउटलेट्स ने भी उनकी प्रशंसा की है।
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