असम, लखीमपुर : असम के राष्ट्रीय स्तर के सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. दिव्यज्योति सैकिया ने असम के गोलाघाट जिले के देरगांव के अजय दत्त नामक 21 साल के एक युवक को पुलिसिया अत्याचार की कड़ी निंदा की है। उनका कहना था कि बिना गलती के सार्वजनिक स्थान पर उनकी पिटाई की वजह से उसने विजयदशमी के दिन आत्महत्या कर ली। फिलहाल लखीमपुर में उपस्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. दिव्यज्योति सैकिया ने इस संदर्भ में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में कुछ एक पुलिसकर्मी अराजकता पैदा कर बार-बार मानवाधिकारों का उल्लंघन करते आ रहे हैं। कुछ पुलिसकर्मी मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के आदेश को भी ठेंगा दिखा रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि उन्हें आम लोगों की कोई परवाह नहीं है और वे उन पर लगातार अत्याचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने पहले एक निर्दोष युवक पर न केवल शारीरिक रूप से अत्याचार किया बल्कि उसे सार्वजनिक स्थान पर अपमान भी किया। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर को पुलिस को यह सब कुछ करने का अधिकार कहां से मिल गया? उन्होंने घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। डॉ. सैकिया ने फिर से सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस दोषी लोगों को भी इस तरह से नहीं पीट सकती। यदि कोई व्यक्ति अपराध करता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने एक निर्दोष युवक को सार्वजनिक स्थानों पर पीटा और अपमानित किया। यहां तक की आत्महत्या कर चुके शव को 13 या 14 घंटे तक पेड़ से लटका कर रखना अमानवीय कार्य है। डॉ. दिव्यज्योति सैकिया ने कहा कि यह घटना मानवाधिकार का उल्लंघन है और इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। उन्होंने दोषी पुलिस कर्मियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है। गौरतलब है कि वह असम की एकमात्र मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं जिन्होंने देश और असम में विभिन्न पुलिस अत्याचारों और फर्जी मुठभेड़ों के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।
शीतकालीन अवकाश के बाद पुनः खुल गए स्कूल
शीतकालीन अवकाश के बाद पुनः खुल गए स्कूल उत्तर प्रदेश, लखनऊ : उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालय शीतकालीन अवकाश के...
Read more





