असम काश्तकारी (संशोधन) विधेयक 2021 पारित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया असम

असम, गुवाहाटी:   असम विधानसभा के चालू बजट सत्र के आज अंतिम दिन 7 संशोधन विधेयक पारित किया। इनमें असम कर्मचारी अभिभावक जिम्मेदारी एवं जवाबेदही तथा निगरानी नियम (संशोधन) विधेयक 2021, पंजीकरण (असम संशोधन) विधेयक 2021, असम पेशे, व्यापार, कॉलिंग और रोजगार कराधान (संशोधन) विधेयक 2021, असम काश्तकारी (संशोधन) विधेयक 2021, असम नगरपालिका (दूसरा संशोधन) विधेयक – 2021, माजुली सांस्कृतिक विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2021 एवं भारतीय डाक टिकट (असम संशोधन) विधेयक 2021 शामिल है।

इन विधायकों को क्रमशः वित्त मंत्री अजंता नेउग, राजस्व एवं आपदा मंत्री जोगेन मोहन एवं शहरी विकास मंत्री अशोक सिंघल ने सदन में चर्चा के लिए उठाया था।गौरतलब है कि शहरी विकास मंत्री अशोक सिंघल की ओर से सदन में उठाए गए असम काश्तकारी (संशोधन) विधेयक 2021 के पारित होने से किरायेदारों और मकान मालिक के बीच तकरार में कमीं आएगी। उक्त विधेयक में इस तरह के प्रावधान किए गए हैं, जो किराया कानून को सरल और समावेशी बनाते हैं। इस विधेयक के कानून बनने पर वर्तमान का शहरी क्षेत्र किराया नियंत्रण कानून किला 1972 निरस्त हो जाएगा।

उक्त विधेयक विधायक में जिला स्तर पर रेंट अथॉरिटी, रेंट कोर्ट और रेंट अपीलेट के गठन के भी प्रावधान है। इससे किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच की कानूनी अड़चनें कम होगी। किसी भी तरह के विवाद की स्थिति में उन्हें अदालतों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उनके विवादों के समाधान के लिए एक नियामक प्राधिकरण स्थापित किया जाएगा। हालांकि धार्मिक, चैरिटेबल संगठन और वक्फ के अंतर्गत पड़ने वाली संपत्ति इसके दायरे से बाहर होगी। मंत्री ने कहा कि विधेयक में प्रावधान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाने के लिए जून 2021 में केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित मॉडल किरायेदारी कानून 2021 पर आधारित है। उन्होंने कहा कि कानून असम शहरी क्षेत्र किराया नियंत्रण अधिनियम 1972 को निरस्त करेगा और परिसर के किराए को विनियमित करने और मकान मालिकों और किरायेदारों के हितों की रक्षा के लिए एक किराया प्राधिकरण स्थापित करेगा। किसी परिसर का किराया तय करने में कोई कृत्रिम सीमा नहीं होगी। एक इमारत का किराया बाजार संचालित होगा और किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच आपसी समझौते से निर्धारित किया जाएगा।

यह अधिनियम जिला स्तर पर रेंट अथॉरिटी, रेंट कोर्ट और रेंट अपीलेट की स्थापना के माध्यम से मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच विवादों के निवारण की प्रक्रिया को सरल और तेज करेगा। कानून परिसर के रखरखाव के संबंध में मकान मालिकों और किरायेदारों के कर्तव्यों और दायित्वों को निर्दिष्ट करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून को पारित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह हमारी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है।