असम विधानसभा में असम मवेशी संरक्षण विधेयक -2021 ध्वनि मत से पारित

असम, गुवाहाटी:  असम विधानसभा के चालू बजट सत्र के आज अंतिम दिन विपक्ष के वकआउट के बीच बहुप्रतीक्षित असम मवेशी संरक्षण विधेयक -2021 ध्वनि मत से पारित हो गया। विधेयक के पारित होते ही मवेशियों के वध, उपभोग और परिवहन को विनियमित पर रोक लग जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने विधायक को चर्चा के लिए सदन में उठाया। इसके बाद विपक्षी दलों ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए विधेयक को पारित करने से पहले इसे एक प्रवर समिति को भेजने की मांग की। मुख्यमंत्री ने चर्चा का जवाब देते हुए अपनी बातें रखी और विपक्ष की मांग को ठुकरा दी।

सरकार के इनकार करने के के बाद इसका विरोध करते हुए विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया। इसके बाद विस अध्यक्ष विश्वजीत दैमारी ने असम मवेशी संरक्षण विधेयक विधायक 2021 को ध्वनि मत से पारित करने की घोषणा की। विपक्ष की अनुपस्थिति में विधेयक के पारित होते ही सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सदस्यों ने भारत माता की जय और जय श्री राम के नारे लगाए और मेज थपथपाई।

विधेयक पर चर्चा होने के दौरान ही एकमात्र निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई सदन से बाहर निकल गए। विपक्षी कांग्रेस, एआईयूडीएफ और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सरकार से विधेयक को विधानसभा की प्रवर समिति को समीक्षा के लिए भेजने का आग्रह किया, लेकिन मुख्यमंत्री ने कानून पर चर्चा पर अपने जवाब के दौरान प्रस्ताव को खारिज कर दिया। गौरतलब है कि नया कानून बन जाने पर किसी व्यक्ति के मवेशियों का वध करने पर रोक होगी, जब तक कि उसने किसी विशेष क्षेत्र के पंजीकृत पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया हो।

नये कानून के तहत यदि अधिकारियों को वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं तो राज्य के भीतर या बाहर गोवंश के परिवहन की जांच होगी। हालांकि, किसी जिले के भीतर कृषि उद्देश्यों के लिए मवेशियों को ले जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। इस नए कानून के तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे। इसके अलावा हिंदुओं, जैनियों, सिखों और अन्य लोगों के निवास वाले क्षेत्रों और मंदिर, सत्र या अन्य हिंदू धार्मिक संस्थानों के 5 किमी के दायरे में गौ मांस खाने या बिक्री पर प्रतिबंधित होगा।

आज विधायक पर हुए चर्चा में नेता प्रतिपक्ष देवव्रत सैकिया, अमीनुल इस्लाम (वरिष्ठ), मनोरंजन तालुकदार, रकीबुल हुसैन, रफीकुल इस्लाम, कमलाख्या पुरकायस्थ, अमीनुल इस्लाम एवं सिद्दीक अहमद ने हिस्सा लिया। मालूम हो कि इस विधेयक को असम राज्य में बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं की रक्षा करने की दिशा में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का एक बड़ा कदम माना जा रहा है।