असम मिजोरम सीमा विवाद : असम सरकार पर दल संगठनों का कड़ा प्रहार, लगाया नाकामी का आरोप

असम, गुवाहाटी।:  असम मिजोरम सीमा पर हुई हिंसक वारदात के बाद राज्य में विभिन्न दल संगठनों का सरकार पर हल्ला बोल जारी है। सभी सरकार की नाकामी पर जमकर लताड़ लगा रहे हैं। इस कड़ी में अखिल असम छात्र संघ (आसू) ने आज आरोप लगाया कि एक बड़ी खुफिया विफलता के परिणामस्वरूप कछार जिले के लैलापुर में असम मिजोरम की सीमाओं पर हिंसा हुई।

संगठन ने राज्य पुलिस पर कथित गोलीबारी के लिए मिजोरम पुलिस की निंदा की और मिजोरम सरकार से दोषियों पर तुरंत कार्रवाई करने की मांग की। संगठन के अध्यक्ष दीपांक कुमार नाथ ने कहा इतनी बड़ी खुफिया विफलता कैसे हो सकती है? यह पूरी तरह से गृह मंत्रालय और केंद्रीय खुफिया विभाग की विफलता है जो वहां की घटनाओं को रोकने में विफल रहे।

असम पुलिस शांतिपूर्ण तरीके से केवल राज्य की अपनी धरती की रक्षा कर रही थी और मिजोरम पुलिस ने उन पर गोलियां चला दीं। यह बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा मिजोरम सरकार को तुरंत दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही हम यह बताना चाहते हैं कि असम किसी को भी अपनी जमीन का एक इंच भी छीनने की इजाजत नहीं देगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए उन्होंने केंद्र से मामले को हमेशा के लिए निपटाने के लिए कहा।

पूर्वोत्तर राज्यों के बीच एक सामान्य भाईचारा है और इसके अलावा सभी पूर्वोत्तर राज्यों में एनडीए गठबंधन दलों का शासन है। इसलिए मामले को सुलझाने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। ऐसी घटनाओं को अब और नहीं दोहराना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मामले को उठाने के लिए अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में अपने समकक्षों के संपर्क में है। उधर असम प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष एवं उत्तर करीमगंज के विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने आज असम मिजोरम सीमा पर हुई हिंसक झड़प पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहां की जो सरकार राज्य के जनता की जान माल की सुरक्षा नहीं कर सकती उसे सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

आज पार्टी मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने सवाल उठाया की केंद्रीय गृह मंत्री यहां आते हैं और सीमा मुद्दों पर चर्चा भी करते हैं। फिर ऐसी घटना कैसे हो गई है? उन्होंने कहा कि जो सरकार अपने लोगों को सुरक्षा नहीं दे सकती, उसे इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा पूर्वोत्तर गणतंत्र मोर्चा (नेडा) के संयोजक होने के नाते उनका पूर्वोत्तर राज्य के मुख्यमंत्रियों से बेहतर संपर्क है तो फिर यह घटना क्यों हुई।

उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार को असम-मिजोरम सीमा हिंसक झड़प में मारे गए पुलिस कर्मियों के परिवारों को 25 लाख और घायलों को जल्द से जल्द 10 लाख रुपए का आर्थिक अनुदान देना चाहिए। पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री सिद्दीक अहमद ने कहा कि पड़ोसी राज्य से सीमा विवाद पुराना मुद्दा है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य हम पर लगातार आक्रमण कर रहे हैं लेकिन दक्ष मुख्यमंत्री जिनके हाथों में गृह विभाग भी है क्यों इस तरह की घटनाएं हुई। मामला काफी संवेदनशील है इसलिए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर समस्या के समाधान के लिए कदम उठाने चाहिए।

पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं विधायक जाकिर हुसैन सिकदर का कहना था कि इस घटना के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यहां शांति लाने आए थे या फिर अशांति पैदा करने। ताजा घटना गृह विभाग की बड़ी विफलता दर्शाता है। घटना को रोकने में नाकाम रही सरकार की हम कड़ी शब्दों में आलोचना करते हैं।