असम, गुवाहाटी: पूर्वोत्तर छात्र संगठन (नेसो) ने आज कहा कि असम और मिजोरम के सीमा विवाद को लेकर हुए हिंसक झड़प को केवल सीमा संघर्ष बताया। संगठन का कहना था कि यह कोई जातीय संघर्ष नहीं है इसलिए क्षेत्र के लोगों को एकजुट रहने की अपील की।
यह संघर्ष केंद्र और राज्य सरकारों की अक्षमता का परिणाम है, जो अब तक पुराने सीमा विवादों को हल करने में असमर्थ रहे है। आज यहां जारी एक बयान में संगठन के अध्यक्ष सैमुअल बी. जराई सलाहकार डॉ समुज्जल कुमार भट्टाचार्य और महासचिव सिनम प्रकाश सिंग ने कहा कि हम सभी स्वदेशी लोगों से यह कहना चाहते हैं कि यह विवाद एक जातीय मुद्दा नहीं है, बल्कि सीमा विवाद का है, जिसमें संबंधित राज्य सरकारें हल करने के लिए बाध्य हैं।
बयान में आगे कहा गया है कि सीमा विवाद अलग-अलग होते हैं और एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भिन्न होते हैं। हालांकि हम एक बार फिर सभी राज्य सरकारों से इस लंबित समस्या को हमेशा के लिए हल करने के लिए प्रतिबद्ध होने का आग्रह करते हैं। बयान में यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार को समस्या के समाधान के लिए अपनी ओर से पहल करनी चाहिए।
हम भी अपनी ओर से सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों से आपसी संपर्क और बीच के संबंधों को प्रोत्साहित करने का प्रयास जारी रखेंगे। इन नेताओं का यह भी कहना था कि समस्या का सर्वमान्य समाधान निकाला जाना चाहिए और फिर सीमाओं का उचित रूप से सीमांकन किया जाना चाहिए। ऐसा होने पर ही विभिन्न राज्यों के बीच शांति होगी और सीमाओं मैं रहने वाले लोग बिना किसी डर और आपस में सद्भाव से रह सकते हैं।
गौरतलब है कि 26 जुलाई कोअसम और मिजोरम के पुलिस बलों के बीच सीमा पर सशस्त्र संघर्ष में छह पुलिसकर्मियों सहित कम से कम सात लोगों की जान चली गई थी।



