असम, गुवाहाटी : अखिल असम छात्र संघ (आसू) नेता अनिमेष भुइयां की भीड़ द्वारा की गई निर्मम हत्या मामले में पुलिस ने मुख्य अभियुक्त नीरज दास सहित तेरह लोगों को गिरफ्तार किया है। गौरतलब है कि जोरहाट के निर्माली चारीआली इलाके में कल दिनदहाड़े उग्र भीड़ ने गोलाघाट जिले के निवासी अनिमेष भुइयां की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। भीड़ के हमले में एक पत्रकार सहित दो लोग बुरी तरह घायल हो गए थे।
घायलों का इलाज जोरहाट चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (जेएमसीएच) में चल रहा है। इस इस घटना के बाद राज्यभर में हो रही प्रतिक्रिया के बीच मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने पुलिस को 15 दिनों के भीतर चार्जशीट दायर करने का निर्देश दिया है। उधर राज्य के शिक्षा विभाग के मंत्री रनोज पेगू ने मृतक अनिमेष के घर जाकर उसके परिजनों से मुलाकात की।
मंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने के कदम उठाएंगी।जोरहाट के पुलिस अधीक्षक अंकुर जैन ने बताया कि इस घटना को लेकर अब तक विभिन्न स्थानों से 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा मुख्य आरोपी नीरज दास को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। हम प्रत्यक्षदर्शियों से बात कर रहे हैं और वीडियो फुटेज से पुष्टि कर रहे हैं कि क्या इस घटना में और लोग शामिल थे।
आसू के मुख्य सलाहकार समुज्जल कुमार भट्टाचार्य और अध्यक्ष दीपंका कुमार नाथ ने भुइयां के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की और संवेदना व्यक्त की। नाथ ने कहा कोई चूक न हो इसके लिए हम कड़ी निगरानी रखेंगे। हम तब तक चुप नहीं बैठेंगे जब तक हमारे सहयोगी के हत्यारों को कड़ी सजा नहीं मिल जाती। असम के राष्ट्रीय स्तर के मानवाधिकार कर्मी एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. दिव्यज्योति सैकिया ने जोरहाट की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है।उन्होंने मॉब लिंचिंग के खिलाफ कठोर कानून बनाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि राज्य में मॉब लिंचिंग की घटनाएं रोकने के लिए सख्त से सख्त कानून बनना चाहिए। राज्य में लगातार बढ़ रही मॉब लिंचिंग की घटनाएं सामने आने के बाद हम मांग करते हैं कि ऐसी घटनाओं पर काबू पाने के लिए राज्य सरकार को कानून बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिंग के आरोपियों को कठोर दंड दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संलिप्त लोगों को उम्र कैद की सजा मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिये हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था। न्यायालय ने संसद से मॉब लिंचिंग के खिलाफ नया और सख्त कानून बनाने को कहा। न्यायालय ने इस संबंध में कहा कि कोई भी नागरिक अपने आप में कानून नहीं बन सकता है। उनका यह भी कहना था कि लोगों के अंदर कानून का डर खत्म हो गया है।
जब तक सख्त कानून नहीं बनेंगे तब तक इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लग सकती। उनका कहना था कि यह पुलिस प्रशासन एवं सरकार की विफलता भी कही जा सकती है। पुराने घटनाओं को सामने रखकर अगर त्वरित कार्रवाई होती तो शायद घटनाएं दोबारा नहीं होती।





