असम, गुवाहाटी: असम सरकार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर असम मिजोरम सीमा संघर्ष में शहीद हुए 6 पुलिस कर्मियों को मुख्यमंत्री पुलिस पदक और 5 अन्य पुलिस कर्मियों को मुख्यमंत्री उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित करने की घोषणा की है।
गौरतलब है कि हाल ही में असम मिजोरम सीमा संघर्ष मेंअसम पुलिस के 6 नायकों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। इन बहादुर पुलिस कर्मियों के सम्मान के रूप में असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने इन मानद पदकों की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री विशेष सेवा पदक प्राप्त करने वाले 6 शहीदों में 21 वीं असम पुलिस (आईआर) बटालियन के स्व. एसआई (एबी) स्वपन कुमार रॉय, 6वें एपीबीएन स्व हवलदार श्याम सुंदर दुसाद, 21 वीं एपी (आईआर) बटालियन के कांस्टेबल स्व. सैमसुज्जमां बरभुइया, कछार डीईएफ के कांस्टेबल एबी स्व. लिटन सुकलाबैद्य, स्व. कांस्टेबल मजरूल हक बरभुइया और 6 वीं एपी बटालियन के कांस्टेबल नजरूल हुसैन शामिल है।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री के उत्कृष्ट सेवा पदक के लिए चुने गए अधिकारियों और कर्मियों में कछार जिले के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक आईपीएस वैभव सी निंबालकर, पुलिस आयुक्त कार्यालय इंस्पेक्टर (यूबी) मुकुल काकोटी, विश्वनाथ जिला के इंस्पेक्टर (यूबी) सत्येन सिंह हजारी, खटखटी पुलिस थाने के प्रभारी मब्लिक ब्रह्मा और कांस्टेबल बोरसिंह बे शामिल है। गौरतलब है कि असम-मिजोरम सीमा के साथ कछार जिले के लैलापुर में हिंसक सीमा संघर्ष में गंभीर रूप से घायल हुए आईपीएस अधिकारी वैभव सी निंबालकर को मुख्यमंत्री के उत्कृष्ट सेवा पदक देने की घोषणा को लेकर उनके शुभचिंतकों एवं चाहने वालों में खुशी की लहर है।
घायल वैभव का इलाज मुंबई के कोकिलाबेन अंबानी अस्पताल में चल रहा है। सर्जरी के बाद उनके हालत में लगातार सुधार आ रहा है। 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी की फीमर की हड्डी में कई फ्रैक्चर हुआ था। उल्लेखनीय है कि उनकी पहचान एक दक्ष पुलिस अधिकारी के रूप में होती है।
कछार के पुलिस अधीक्षक के रूप में ड्रग्स के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान उन्हें व्यापक सफलता मिली थी और चारों ओर उनकी जमकर प्रशंसा की गई थी। केवल एक से डेढ़ महीने में ही उन्होंने 9 करोड़ से अधिक रुपए के नशीले पदार्थ बरामद किए थे। इससे पहले भी तिनसुकिया के एसपी के रूप में उन्होंने काफी ख्याति बटोरी थी। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान उन्होंने जो कार्य किया था उसकी प्रशंसा न केवल पुलिस बल्कि जनता ने भी की थी। अपराधियों में उनका नाम दहशत के रूप में लिया जा रहा था।
जोरहाट माजुली और देरगांव के पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में बतौर प्रिंसिपल की भूमिका भी काफी सराहनीय थी। जानकार मानते हैं कि उन्हें यह इनाम इन सब सेवाओं के बदले ही मिला है। इस संदर्भ में राष्ट्रीय स्तर के मानवधिकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. दिव्यज्योति सैकिया कहते हैं कि पुरस्कृत पुलिसकर्मियों में वैभव एकमात्र आईपीएस अधिकारी हैं जिन्हें यह पुरस्कार दिया गया है। यह उनकी काबिलियत को ही दर्शाता है।
उन्हें पुरस्कार दिए जाने पर वे उन्हें अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करते हैं और उम्मीद करते हैं कि आगे भी वे अपने कार्यों को निष्ठा एवं ईमानदारी से करेंगे।



