झारखंड, रांची : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएचएफएस-5) की ताजा रिपोर्ट आ गयी है। कई मानकों पर अब भी झारखंड काफी पिछड़ा है। झारखंड में 31.5 फीसदी महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हो रही हैं। 67.5 फीसदी बेटियां एनीमिया (रक्ताल्पता) की शिकार हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में जन्म के समय लिंगानुपात 899 है।
राज्य में महिला साक्षरता की दर अब भी 61.7 फीसदी ही हो पायी है। 10 साल से अधिक उम्र की महज 33.2 फीसदी लड़कियां ही स्कूल जा रही हैं।एनएचएफएस-5 के आंकड़े बताते हैं कि आज भी राज्य में कम से कम 32.2 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल की आयु पूरी करने से पहले हो जाती है।
राज्य की आबादी का 65.8 फीसदी किशोर में खून की कमी की समस्या है। यानी इतनी बड़ी आबादी एनीमिक है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में एनीमिया की बात करें, तो यह 67.5 फीसदी है। यानी राज्य में जन्म लेने वाले आधे से अधिक बच्चों में खून की कमी है। राज्य की 31.5 फीसदी महिलाओं को घरेलू हिंसा झेलनी पड़ती है।
इनमें से 3.1 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें किसी न किसी रूप में शारीरिक हिंसा झेलनी पड़ती है। सर्वेक्षण में शामिल 1.3 फीसदी महिलाओं ने बताया है कि उन्हें यौन हिंसा का शिकार होना पड़ा है।






