विपक्ष के नेता ने असम सरकार की की जमकर खिंचाई

असम, गुवाहाटी:  असम प्रदेश कांग्रेस विधायक दल के मुखिया एवं नेता प्रतिपक्ष देवव्रत सैकिया ने राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि वह महिलाओं की सुरक्षा करने में विफल रही है। उन्होंने बड़े बांध को लेकर भी सरकार की जमकर आलोचना की। उन्होंने इन दोनों मुद्दों पर चर्चा के लिए विधानसभा के 1 दिन के विशेष सत्र बुलाने की मांग की।

आज विधानसभा परिसर के नए विधायक आवास सभागार में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने सरकार से वर्तमान के कामकाज को लेकर भी जमकर खिंचाई की। उन्होंने निचले सुवनसिरी पनबिजली परियोजना से उत्पन्न बाढ़ की स्थिति के लिए सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि विधानसभा की ओर से इस मुद्दे पर गठित सदन कमेटी की रिपोर्ट को नजरअंदाज कर सरकार परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करने में जुटी है। जिस तरह से परियोजना से निकले पानी की वजह से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं उस समय सरकार लोगों के जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा के बजाय परियोजना पर ही ध्यान दे रही है।

सरकार कैसे लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर सकती है। जब विशेषज्ञ समितियों ने लघु बांध की वकालत की है तो सरकार कैसे इसके पूरा करने को लेकर तत्पर है। ऐसा लगता है कि सरकार को जनता के इस तकलीफ से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने आगे भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार राज्य की महिलाओं की सुरक्षा करने में विफल रही है।
राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध के बारे में बात करते हुए उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य में हर दिन महिलाओं के खिलाफ 9 से अधिक अपराध दर्ज किए जाते हैं।

महिलाओं के खिलाफ अपराध को नियंत्रित करने में पुलिस प्रशासन विफल रही है। उनकी मांग थी कि राज्य के प्रत्येक उप-मंडल में कम से कम एक महिला पुलिस थाना होना चाहिए। उन्होंने डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार के कोविड प्रबंधन की आलोचना करते हुए कहा कि कैसे बस सेवाओं को रोक दिया गया है, लेकिन रेलवे सेवाएं खुली हैं, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से लोग आते हैं और ट्रेनों के यात्रियों का कोई कोविड परीक्षण नहीं किया जाता है।

केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल की जन आशीर्वाद यात्रा पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी जन आशीर्वाद यात्रा राज्य के लिए शापित यात्रा बन गई है। सरकार जनता से कोविड नियमों के अनुपालन की बात करती है लेकिन सरकार और उनके पार्टी के लोग ही इन नियमों को तोड़ते हैं।उन्होंने सार्वजनिक संपत्तियों का निजीकरण को भी दुर्भाग्यजनक बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपने शासन में जिन संपत्तियों को बनाया था अब उन्हें ही अमीरों को अमीर और गरीब को गरीब बनाने के लिए बेच रही है।

पड़ोसी राज्यों के साथ सीमा संघर्ष पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि विवादों को सुलझाने में पूर्वोत्तर गठबंधन (नेडा) के संयोजक ने कोई मजबूत भूमिका नहीं निभाई है। उनकी कमजोर भूमिका का खामियाजा राज्य को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने पिछली बार की तरह इस बार भी विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था किए जाने की बात कही। उन्होंने दीमा हसाओ के हालात पर कानून-व्यवस्था की कड़ी कार्रवाई किए जाने की वकालत की।