उत्तर प्रदेश, मेरठ : 45 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री आवास योजना लापरवाही की भेंट चढ़ रही है। सजग प्रहरी संस्था की शिकायत पर 47 आवासों की जांच की गई, जिसमें लापरवाही का खुलासा हुआ है। मकानों की जियो टैगिंग में गड़बड़ की गई है। घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। एक ही प्लॉट की फोटोग्राफी कर कई भवन दर्शाए गए हैं। जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजी गई है। योजना के तहत नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में रहने वाले जिन गरीब लोगों के पास 30 वर्ग मीटर भूमि है और उनके पास अपना मकान नहीं है तो ऐसे परिवारों को पीएम आवास योजना का लाभ मिलता है। अगर पात्र के नाम जमीन नहीं है तो उसके माता पिता को भी पात्रता सूची में शामिल किया जा सकता है। मकान बनाने के लिए 2.50 लाख रु पये तीन किस्तों में दिए जाते हैं। इस योजना के तहत 20 हजार आवास बनाए जाने हैं। लगभग तीन हजार मकानों पर काम चल रहा है। योजना के लिए पात्र परिवार, भूमि के चयन से लेकर भवन निर्माण तक निगरानी रखने की जिम्मेदारी प्रशासन और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग कंसल्टेंसी की है। निगम कर्मचारी भी पात्रता की जांच करते हैं। मेरठ में बनवाए जा रहे आवासों में भ्रष्टाचार की शिकायत सजग प्रहरी सामाजिक संस्था के जिलाध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने 11 नवंबर 2022 को कमिश्नर सेल्वा कुमारी जे से की थी। कमिश्नर के निर्देश पर डीएम दीपक मीणा ने सिटी मजिस्ट्रेट डॉ. अमरेश कुमार और सहायक नगरायुक्त इंद्रविजय को जांच सौंपी थी।
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