हल्दिया जहाजघाट से पांडू घाट के बीच जल यातायात व्यवस्था को बनाया जाएगा सुगम : सर्वानंद सोनोवाल

पश्चिम बंगाल, हल्दिया : केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी, जलमार्ग एवं आयुष सर्वानंद सोनोवाल ने आज अपने दो दिवसीय कोलकाता प्रवास के तहत हल्दिया जहाजघाट पहुंचे और यहां के विभिन्न योजनाओं का जायजा लिया। गौरतलब है कि हल्दिया जहाजघाट हल्दिया नगर में हल्दी नदी और हुगली नदी के संगम के समीप स्थित समुद्री जहाज पर माल लादने-उतारने का परिसर है। हालांकि यह बंगाल की खाड़ी के समीप है और इसे बंदरगाह भी कहा जाता है।

यह वास्तव में कोलकाता बंदरगाह को अपनी सेवाएं प्रदान करता है। जहाजघाट पर पहुंचने के बाद ही केंद्रीय मंत्री को सीआईएसएफ के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया। इसके बाद मंत्री ने क्रूज पर अधिकारियों के साथ उपस्थित हुए और विभिन्न कामकाज के बारे में जानकारी हासिल की। इस मौके पर पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनके मंत्रालय का लक्ष्य हल्दिया जहाजघाट से पांडू घाट के बीच जल यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने पर जोर दे रही है।

उन्होंने आगे कहा कि इस व्यवस्था को अगर स्थाई बनाया जाए तो न केवल असम के उत्पादित माल को जल मार्ग के जरिए हल्दिया लाया जा सकेगा बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया के राष्ट्रों को भी निर्यात किया जा सकेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए ब्रह्मपुत्र मैं खनन प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कदम उठाएगी। ब्रह्मपुत्र की गहराई कम होने के कारण बड़े मालवाही जहाज यहां से वहां नहीं जा पाते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इस व्यवस्था को अगर स्थाई बनाया जाए तो न केवल असम के उत्पादित माल को जल मार्ग के जरिए हल्दिया लाया जा सकेगा बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया के राष्ट्रों को भी निर्यात किया जा सकेगा।

इसलिए हम खनन पर जोर दे रहे हैं। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो असम के उत्पादित सामग्रियों को जलमार्ग के जरिए विश्व के बाजार तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह उनका पहला दौरा था और आने वाले दिन वे इस पूरी व्यवस्था की समीक्षा करेंगे और भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों के बारे में निर्णय लेंगे। उनका मकसद असम सहित पूर्वोत्तर राज्य जलमार्ग यातायात व्यवस्था से जोड़ने की है।

ऐसा होने पर ही न केवल असम बल्कि पूर्वोत्तर की आर्थिक बुनियाद भी मजबूत होगी। इस बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए वे पूर्वोत्तर राज्य सरकार से भी सहयोग की अपेक्षा रखते हैं। अगर सभी राज्य सरकार अपना सहयोग देते हैं तो आने वाले दिनों में जल मार्ग से पूर्वोत्तर के अर्थव्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री ने जहाज घाट के कई स्थानों का भी निरीक्षण किया।