इजराइल, यरूशलेम, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली संभावित बैठकों और वार्ताओं को लेकर एक बेहद सख्त और बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच क्या बातचीत होती है या उस मीटिंग का क्या नतीजा निकलता है, इससे इज़राइल को कोई फर्क नहीं पड़ता। नेतन्याहू का यह बयान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इज़राइल की स्वतंत्र और आक्रामक विदेश नीति को रेखांकित करता है, विशेषकर तब जब बात देश की सुरक्षा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी हो। नेतन्याहू के इस बयान का सीधा मतलब यह है कि इज़राइल अपनी सुरक्षा के फैसलों के लिए किसी भी तीसरे देश या वैश्विक समझौते पर निर्भर नहीं रहने वाला है। वह लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में उसके बढ़ते प्रभाव को इज़राइल के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते आए हैं। अतीत में जब साल 2015 में ओबामा प्रशासन के दौरान अमेरिका और अन्य वैश्विक शक्तियों ने ईरान के साथ परमाणु समझौता किया था, तब भी नेतन्याहू ने इसका खुलकर विरोध किया था। उनका मानना है कि इस तरह के समझौतों से ईरान को परमाणु हथियार बनाने से पूरी तरह नहीं रोका जा सकता, बल्कि उसे केवल कुछ समय के लिए टाला जा सकता है।इस बयान के ज़रिए नेतन्याहू ने न केवल ईरान को बल्कि अपने सबसे करीबी सहयोगी देश अमेरिका को भी एक कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने यह साफ कर दिया है कि अगर वाशिंगटन और तेहरान के बीच कोई कूटनीतिक बातचीत या नया समझौता होता भी है, तो इज़राइल अपनी सुरक्षा के लिए बाध्य नहीं होगा। यदि इज़राइल को लगता है कि ईरान उसके लिए खतरा बन रहा है, तो वह किसी भी समय, किसी भी तरह की सैन्य या खुफिया कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।नेतन्याहू का यह रुख यह भी दिखाता है कि इज़राइल ईरान के मामले में किसी भी तरह के ढुलमुल रवैये या कूटनीतिक रियायतों के खिलाफ है। वह लगातार वैश्विक मंचों पर ईरान पर अधिकतम प्रतिबंध लगाने और सैन्य दबाव बनाए रखने की वकालत करते रहे हैं। ऐसे में उनका यह ताजा बयान मध्य पूर्व के अशांत राजनीतिक माहौल में इज़राइल के आक्रामक और अडिग इरादों को एक बार फिर दुनिया के सामने मजबूती से रखता है।
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