असम, गुवाहाटी : असम में 2027 की ऐतिहासिक जनगणना की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य में 17 अगस्त से 15 सितंबर के बीच घरों की सूची बनाने और उनके आवास की गणना करने का पहला चरण शुरू होगा। यह अभियान न केवल जनसंख्या के आंकड़ों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य की सरकारी योजनाओं का आधार भी बनेगा। इस बार की जनगणना में सबसे बड़ा बदलाव स्व-गणना का विकल्प है। 2 अगस्त से 16 अगस्त तक निवासियों के पास यह विकल्प होगा। लोग सरकारी पोर्टल के माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जानकारी स्वयं ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इससे उन लोगों को सुविधा होगी, जो प्रगणकों के घर आने के समय उपलब्ध नहीं रह पाते, साथ ही डेटा की सटीकता भी बढ़ेगी। स्व-गणना की अवधि समाप्त होने के बाद 17 अगस्त से प्रगणक घर-घर जाकर डेटा एकत्र करना शुरू करेंगे। इस बार कागजी फॉर्म के बजाय मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग होगा। प्रगणक सीधे ऐप पर जानकारी भरेंगे और उसे तुरंत सर्वर पर अपलोड कर देंगे। राष्ट्रीय समय-सारणी की तुलना में असम में यह प्रक्रिया थोड़ी देरी से शुरू हो रही है। इसका मुख्य कारण भौगोलिक परिस्थितियां और प्रशासनिक तैयारियां बताई जा रही हैं। इस चरण का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक घर की भौतिक स्थिति और वहां रहने वाली सुविधाओं का विवरण जुटाना है। इसमें मकान पक्का है या कच्चा, कमरों की संख्या और छत-दीवारों में प्रयुक्त सामग्री। पीने के पानी का स्रोत, बिजली, शौचालय की सुविधा और रसोई के ईंधन का प्रकार। रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट, वाहन (साइकिल/कार) और मोबाइल फोन की उपलब्धता। जनगणना 2027 भारत के इतिहास की पहली 100 प्रतिशत डिजिटल जनगणना होगी। डिजिटल माध्यम होने के कारण केंद्र और राज्य सरकारें वास्तविक समय में डेटा की निगरानी कर सकेंगी। इसके लिए एक विशाल सेंसस पोर्टल और मजबूत तकनीकी बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है ताकि डेटा सुरक्षित रहे और उसका विश्लेषण तेजी से किया जा सके। असम में होने वाला यह 30 दिवसीय अभियान 2027 की मुख्य जनसंख्या गणना का आधार तैयार करेगा। डिजिटल प्रक्रिया अपनाए जाने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि मानव त्रुटि की संभावना भी कम होगी, जिससे राज्य के विकास के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे।
सिविल सेवक शासन की रीढ़ : मुख्यमंत्री
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