छत्तीसगढ़, रायपुर : असम के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब छत्तीसगढ़ में असम के सांस्कृतिक पुरोधा रूपकुंवर ज्योतिप्रसाद अग्रवाल की याद को जीवंत रखा जाएगा। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमन डेका की पहल पर राज्य में सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े एक प्रतिष्ठित व्यक्ति को हर साल रूपकुंवर ज्योतिप्रसाद अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमन डेका ने बताया कि उनके विशेष अनुरोध पर रायपुर की अग्रवाल सभा ने हर साल सांस्कृतिक जगत की किसी महान हस्ती को रूपकुंवर ज्योतिप्रसाद अग्रवाल पुरस्कार प्रदान करने का निर्णय लिया है। ज्योतिप्रसाद अग्रवाल के नाम पर इस पुरस्कार की घोषणा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि असम के साहित्य, संगीत, नाटक और फिल्म जगत में रूपकुंवर का योगदान अतुलनीय है और उनकी रचनाएं व आदर्श आज भी असमिया जाति की सांस्कृतिक चेतना को समृद्ध कर रहे हैं। उन्होंने इस सराहनीय कदम के लिए अग्रवाल सभा, रायपुर के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल असम की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करने के साथ-साथ सांस्कृतिक क्षेत्र में दिए जाने वाले योगदान को एक नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के राज्यपाल का पदभार संभालने के बाद से ही रमन डेका लगातार वहां असमिया संस्कृति और परंपरा के प्रचार-प्रसार में जुटे हुए हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ और असम के बीच सांस्कृतिक समन्वय को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में उन्होंने छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के नाम पर एक शोध पीठ की स्थापना कराई है, जिसके माध्यम से राज्य में श्रीमंत शंकरदेव के दर्शन, संस्कृति और साहित्य पर अध्ययन और अनुसंधान के विशेष अवसर सृजित किए गए हैं।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ के राजा चक्रधर सिंह के नाम पर असम नाट्य सम्मेलन को एक चलताऊ पुरस्कार प्रदान करने के लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ राजभवन के फंड से दो लाख रुपये की वित्तीय सहायता की व्यवस्था की है। साथ ही, उनके कार्यकाल में पहली बार छत्तीसगढ़ राजभवन में आधिकारिक तौर पर लाचित दिवस और डॉ. भूपेन हजारिका दिवस का आयोजन किया गया है। राज्यपाल रमन डेका के संरक्षण और प्रोत्साहन से ही वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर नाटककार जितेन शर्मा द्वारा हिंदी में लिखित नाटक लाचित बरफुकन का मंचन किया गया था। इसके साथ ही हाल ही में अपने माजुली दौरे के दौरान राज्यपाल रमन डेका ने श्रीश्री आउनीआती सत्र का दौरा किया था और वहां के लगभग 30 कलाकारों के भावना दल को छत्तीसगढ़ आकर महापुरुषिया अंकिया भावना (रुक्मिणी हरण) का मंचन करने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है।






