असम, गुवाहाटी : ब्रिक्स एंटी-ड्रग्स सम्मेलन का आयोजन वैश्विक स्तर पर नशीली दवाओं के बढ़ते अवैध कारोबार और नशे की लत के खिलाफ एक बेहद जरूरी और सराहनीय कदम है। राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. दिब्यज्योति सैकिया ने इस महत्वपूर्ण पहल का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया है। उनका मानना है कि नशा आज न केवल युवाओं के जीवन को अंधकार में धकेल रहा है, बल्कि उनके फलने-फूलने और गरिमापूर्ण जीवन जीने के मूलभूत मानवाधिकारों का भी सबसे ज्यादा हनन कर रहा है। ऐसे में ब्रिक्स जैसे शक्तिशाली अंतरराष्ट्रीय मंच के माध्यम से नशीली दवाओं के खिलाफ एकजुट होना समाज और मानव अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित होगा।इस सम्मेलन के दूरगामी प्रभावों की चर्चा करते हुए डॉ. सैकिया ने उम्मीद जताई है कि इस साझा मंच के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए ठोस और व्यावहारिक रणनीतियां तैयार की जा सकेंगी। वर्तमान समय में ड्रग्स माफियाओं का नेटवर्क किसी एक देश तक सीमित न रहकर सीमाओं के पार फैल चुका है, जिसे केवल आपसी सहयोग और सख्त वैश्विक नीतियों के बल पर ही तोड़ा जा सकता है। डॉ. सैकिया के अनुसार, जब यह प्रभावशाली देश मिलकर खुफिया जानकारी साझा करेंगे और तस्करी के खिलाफ कड़े कदम उठाएंगे, तभी इस अवैध सिंडिकेट की कमर तोड़ी जा सकेगी और दुनिया भर के युवाओं को इस जाल से मुक्त कराकर उनके अधिकारों को सुरक्षित किया जा सकेगा।
मिजोरम मतदाता सूची में विदेशी नागरिकों के शामिल होने का आरोप खारिज
मिजोरम, आइजोल : मिजोरम की मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) गरिमा गुप्ता ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया,...
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