नई दिल्ली : बिहार के भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले पर राष्ट्रीय स्तर के विख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता और असम के मानवाधिकार आंदोलन के प्रमुख चेहरे डॉ. दिव्यज्योति सैकिया ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस पूरी घटना को भारतीय संविधान और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन करार देते हुए गहरा आक्रोश जताया है। डॉ. सैकिया का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को देखने के बाद यह साफ तौर पर समझ आता है कि युवक ने गोली चलने से ठीक पहले अपनी पिस्तौल पुलिस की तरफ फेंक दी थी और वह पूरी तरह निहत्था होकर आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार खड़ा था। ऐसी स्थिति में कानून और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश कहते हैं कि पुलिस को उसे जीवित पकड़ना चाहिए था, न कि उस पर गोलियां बरसाकर उसकी जान लेनी चाहिए थी। जब कोई आरोपी सरेंडर कर रहा हो, तब उस पर गोली चलाना आत्मरक्षा नहीं बल्कि सीधे तौर पर न्यायेतर हत्या यानी एक्स्ट्रा-जुडिशियल किलिंग है।डॉ. दिव्यज्योति सैकिया ने पुलिस द्वारा घटना से ठीक पहले पीड़ित को मानसिक रूप से विक्षिप्त घोषित करने वाले बयान पर भी कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पुलिस को पहले से पता था कि युवक मानसिक तनाव या विक्षिप्तता से जूझ रहा है, तो पुलिस का पहला कर्तव्य उसे बातचीत के जरिए शांत करना और सुरक्षित हिरासत में लेकर स्वास्थ्य केंद्र भेजना होना चाहिए था। भारी सुरक्षा बलों और एसटीएफ की टीम को तैनात करके एक निहत्थे व विक्षिप्त युवक को घेरकर मार देना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि देश में पुलिस द्वारा खुद ही मौके पर न्याय करने वाली यानी जज और जल्लाद की भूमिका में आ जाने की यह प्रवृत्ति किसी भी लोकतांत्रिक समाज और कानून के शासन के लिए बेहद खतरनाक है।बिहार सरकार द्वारा मामले में स्थानीय थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित करने और हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच के आदेश दिए जाने के फैसले का डॉ. सैकिया ने स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही इसे केवल एक शुरुआती कदम बताया है। उनका मानना है कि सिर्फ निलंबन जैसी विभागीय कार्रवाई ऐसे गंभीर मामलों में नाकाफी है। उन्होंने पुरजोर मांग की है कि इस फर्जी एनकाउंटर में शामिल सभी दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) से इस मामले में तत्काल स्वतः संज्ञान लेने और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार पूरी जांच की निगरानी करने की अपील की है ताकि पीड़ित परिवार को हर हाल में निष्पक्ष न्याय मिल सके।
आतंकवादी कसाब को कोर्ट से सजा तो सामाजिक कार्यकर्ता भारत भूषण का त्वरित एनकाउंटर क्यों?: डॉ. दिव्यज्योति सैकिया
असम, गुवाहाटी : असम के राष्ट्रीय स्तर के मानवाधिकार और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. दिव्यज्योति सैकिया ने बिहार के भारत भूषण...
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