असम, गुवाहाटी : असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद दिसपुर के राजनीतिक गलियारों में एक भावुक बदलाव देखा जा रहा है। कई दशकों या कई कार्यकाल से अपने क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक अब भारी मन से सरकारी आवास खाली कर रहे हैं। चुनाव में पराजय के साथ ही इन जनप्रतिनिधियों को अपने सरकारी निवास छोड़ने पड़ रहे हैं, जहां अब नवनिर्वाचित विधायकों का आगमन शुरू हो गया है। विशेष रूप से नाजिरा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे और निवर्तमान विपक्ष के नेता देवव्रत सैकिया जैसे कद्दावर नेता भी अब अपना सामान समेट कर सरकारी आवास छोड़ने को तैयार हैं। सैकिया पिछले 15 वर्षों से इस आवास में रह रहे थे, उनकी विदाई के समय वहां का माहौल काफी भावुक नजर आया। चुनाव परिणामों की सुनामी में इस बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई दिग्गज चेहरों को हार का स्वाद चखना पड़ा है। नाजिरा में कांग्रेस के देवव्रत सैकिया के अलावा बरखेत्री में दिगंत बर्मन और हाजो-सुआलकुची में नंदिता दास जैसे नेताओं को शिकस्त मिली है। वहीं एआईयूडीएफ के लिए यह चुनाव बेहद निराशाजनक रहा, जहां अमीनुल इस्लाम, रफीकुल इस्लाम और अशराफुल हुसैन जैसे कई मौजूदा विधायकों को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा और उसके सहयोगियों की शानदार जीत के कारण विपक्ष के कई गढ़ ढह गए हैं, जिसके चलते अब दिसपुर के विधायक आवासों की नेमप्लेट भी बदलने लगी हैं। दिलचस्प बात यह है कि कई नवनिर्वाचित विधायकों ने आधिकारिक शपथ लेने से पहले ही अपने पसंदीदा आवासों पर अपनी नाम पट्टिकाएं लगानी शुरू कर दी हैं। इस बार के विधानसभा चुनाव में कुल 17 मौजूदा विधायकों को हार का सामना करना पड़ा, जबकि 45 नए चेहरे पहली बार सदन की दहलीज लांघेंगे। इन नए विजेताओं में भाजपा के 26, कांग्रेस के 9, अगप के 6 और बीपीएफ के 3 सदस्य शामिल हैं। चुनाव के आंकड़ों पर गौर करें तो कांग्रेस ने अपनी 10 सीटें गंवाई हैं, जबकि एआईयूडीएफ की संख्या 16 से घटकर मात्र 2 पर सिमट गई है। इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के बीच जहां पुराने विधायक अपनी स्मृतियों और भावनाओं के साथ सरकारी आवासों को अलविदा कह रहे हैं, वहीं नए चेहरों में दिसपुर पहुंचने और अपनी नई ज़िम्मेदारियाँ संभालने को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।
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