सोनोवाल के आवास पर बिहू की धूम

नई दिल्ली में सोनोवाल के आवास पर सजी बिहू उत्सव की रंगीन शाम

नई दिल्ली : केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल के नई दिल्ली सरकारी आवास पर आयोजित बिहू उत्सव ने राष्ट्रीय राजधानी के हृदय में असम की सांस्कृतिक जीवंतता और पारंपरिक ऊष्मा को पूरी तरह से उतार दिया। दिल्ली की चिलचिलाती गर्मी भी लोगों के उत्साह को कम नहीं कर पाई और मंत्री के निवास पर भारी संख्या में पहुंचे लोगों ने असमिया संस्कृति के इस सबसे महत्वपूर्ण पर्व को बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया। शाम का वातावरण ढोल, पेपा और गोगोना की ध्वनियों से गुंजायमान रहा, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को असम की मिट्टी की खुशबू का अहसास कराया। यह आयोजन केवल एक उत्सव मात्र नहीं था, बल्कि दिल्ली के व्यस्त और औपचारिक माहौल में असम की समृद्ध विरासत और आपसी भाईचारे को प्रदर्शित करने वाला एक सशक्त मंच बन गया। ​कार्यक्रम की शुरुआत और मुख्य आकर्षण सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ रहीं, जिनमें संगीत और नृत्य के बेजोड़ संगम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मशहूर गायक अच्युर्य बोरपात्र और नाहिद आफ्रीन ने अपनी शानदार गायकी से समां बांधा और एक के बाद एक बेहतरीन गीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को उत्सव के चरम पर पहुंचा दिया। इसी कड़ी में दिल्ली विश्वविद्यालय के अखिल असम छात्र संघ के छात्रों ने पारंपरिक बिहू-हुंचुरी नृत्य पेश किया, जिसकी ऊर्जा और लयबद्धता ने उपस्थित अतिथियों को तालियाँ बजाने पर मजबूर कर दिया। इसके अतिरिक्त पार्थ प्रतिम हजारिका द्वारा असम के महान कलाकार दिवंगत जुबिन गर्ग की कविताओं का पाठ किया गया, जिसने कार्यक्रम में एक भावनात्मक गहराई जोड़ दी और लोगों को असमिया कला जगत के उस महानायक की याद दिला दी।​सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संपन्न होने के बाद मेहमानों के लिए पारंपरिक असमिया व्यंजनों की विशेष व्यवस्था की गई थी। मेहमानों ने पीठा, लारू और अन्य पारंपरिक पकवानों का आनंद लेते हुए एक-दूसरे को बिहू की शुभकामनाएं दीं। केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने खुद सभी आगंतुकों का स्वागत किया, जिससे इस उत्सव में एक पारिवारिक जुड़ाव महसूस हुआ। यह शाम असमिया समुदाय के बीच एकता और अपनी जड़ों के प्रति सम्मान को समर्पित रही, जहां राजनीतिक और सामाजिक जगत की विभिन्न हस्तियों ने एक साथ मिलकर बिहू की खुशियां बांटीं। कुल मिलाकर, मंत्री आवास पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि भौगोलिक दूरियों के बावजूद परंपराएं और त्योहार दिल के सबसे करीब रहते हैं।

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