कार्यकर्ता डॉ. दिव्यज्योति सैकिया ने फैसले का किया स्वागत असम, गुवाहाटी : असम के बहुचर्चित अभि-नील हत्याकांड में लंबे समय बाद न्याय की जीत हुई है। नगांव सत्र न्यायालय ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 20 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है और साथ ही प्रत्येक पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने यह महत्वपूर्ण निर्णय एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद लिया है, जिससे इस नृशंस कांड के पीड़ितों के परिवारों को राहत मिली है।इससे पहले 20 अप्रैल को अदालत ने इस मामले में 20 आरोपियों को दोषी करार दिया था, जबकि साक्ष्यों के अभाव में 25 अन्य लोगों को बरी कर दिया गया था। यह पूरा मामला साल 2018 का है, जब 8 जून को कार्बी आंगलोंग जिले के डोकमोका स्थित पानजुरी गांव में एक अनियंत्रित भीड़ ने दो युवकों, अभिजीत और नील को बच्चा चोर होने के संदेह में बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला था। इस घटना ने न केवल असम बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।करीब सात साल और दस महीने तक चली न्यायिक प्रक्रिया में कुल 48 आरोपी शामिल थे, जिनमें से तीन नाबालिग थे। शेष 45 आरोपियों में से 20 को कड़ी सजा सुनाई गई है। दोषियों की सूची में विश्वराम स्वर्गियारी, पंगथेंग बसुमतारी, अल्फाजुज तिमुंग, इनसेन इंगती और अन्य शामिल हैं।इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मानवाधिकार कार्यकर्ता और अंधविश्वास विरोधी नेता डॉ. दिव्यज्योति सैकिया ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अदालत के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि समाज से अंधविश्वास और अफवाहों को खत्म करने के लिए सरकार, प्रशासन और आम जनता को एकजुट होकर आगे आना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
तेजी से बदल रहा है मौसम का मिजाज
महाराष्ट्र, मुंबई : महाराष्ट्र में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है, जहाँ एक तरफ राज्य का एक बड़ा...
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