मणिपुर, इम्फाल : मणिपुर में कई प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों के छतरी संगठन समन्वय समिति (कोरकॉम) द्वारा बुलाए गए 12 घंटे के बंद के कारण गुरुवार को राज्य भर में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। इस संगठन ने इस दिन को ‘राष्ट्रीय काला दिवस’ के रूप में मनाया। यह बंद सुबह 6 बजे शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक जारी रहा। बंद के दौरान दुकानें, बाजार और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रहे, जबकि सार्वजनिक परिवहन भी सड़कों से नदारद रहे। इम्फाल और अन्य प्रमुख कस्बों की सड़कें सूनी नजर आईं तथा शैक्षणिक संस्थान और निजी प्रतिष्ठान भी बंद रहे।
घोषणा के अनुसार इस बंद के दायरे से चिकित्सा देखभाल, मीडिया गतिविधियों और धार्मिक मामलों जैसी आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई थी। कोरकॉम ने यह बंद 1949 में भारत द्वारा मणिपुर के कथित विलय के विरोध में बुलाया था। यह संगठन हर साल 15 अक्टूबर को ‘राष्ट्रीय काला दिवस’ के रूप में मनाता है और दावा करता है कि इस विलय के परिणामस्वरूप मणिपुर की संप्रभुता और राजनीतिक अधिकार छिन गए थे।
अपने बयान में कोरकॉम ने आरोप लगाया कि भारत के साथ मणिपुर का विलय अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन था और इसने विलय से पहले राज्य के राजनीतिक तथा संवैधानिक दर्जे की अनदेखी की। इस विलय से जुड़ी घटनाओं को याद करते हुए संगठन ने दावा किया कि 21 सितंबर 1949 को भारतीय बलों द्वारा महाराजा बोधचंद्र को शिलॉन्ग ले जाया गया था और उन्हें शिलॉन्ग स्थित मणिपुर के महाराजा के आवास ‘रेडलैंड्स’ में विलय समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया था।
कोरकॉम ने इस समझौते को स्वैच्छिक राजनीतिक फैसले के बजाय दबाव का परिणाम बताया। ये आरोप संगठन के उस रुख का हिस्सा हैं जिसके तहत वह भारत में मणिपुर के विलय का विरोध करता है। आवश्यक सेवाओं को छूट मिलने के बावजूद इस बंद का असर पूरे राज्य में व्यावसायिक गतिविधियों, सार्वजनिक परिवहन और शैक्षणिक संस्थानों पर साफ दिखाई दिया।






