असम, गुवाहाटी : असम में हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ और नदी कटान ने एक बार फिर लाखों लोगों की जिंदगी अस्त-व्यस्त कर दी है। इस भीषण प्राकृतिक तबाही और पीड़ितों की दयनीय स्थिति पर राज्य के प्रमुख सामाजिक संगठन ब्रदर्स के महासचिव, राष्ट्रीय स्तर के मानवाधिकार कार्यकर्ता व वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. दिव्यज्योति सैकिया ने तीखा व भावुक संदेश जारी किया है। 27 वर्षों से समाज सेवा में सक्रिय अपनी संस्था ब्रदर्स के जरिए डॉ. सैकिया ने इस कठिन समय में जरूरतमंदों की सहायता के लिए पूरे देशवासियों से एकजुट होकर मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि बाढ़ की विभीषिका में सब कुछ गंवा चुके पीड़ित और वंचित वर्गों को इस वक्त एक-एक तिनके के सहारे की जरूरत है, इसलिए देश के हर नागरिक को अपनी क्षमता अनुसार आगे आकर संवेदनशीलता के साथ मानवीय मदद का हाथ बढ़ाना चाहिए।
असम में बाढ़ से अपना सब कुछ खो चुके बेघर लोगों की पीड़ा व्यक्त करते हुए डॉ. सैकिया ने कहा कि हर इंसान की जिंदगी अनमोल है और इस आपदा के बीच भूखे-प्यासे लोगों की जान बचाना ही सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। सुदूर प्रभावित इलाकों में राशन, पीने का साफ पानी, बच्चों व गर्भवती महिलाओं के लिए दवाइयों की भारी किल्लत है। इस स्थिति पर नेताओं और राजनीतिक दलों के रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव के समय घर-घर जाकर जमीन पर बैठकर खाना खाने और बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता बाढ़ आते ही धरातल से गायब हो जाते हैं। आपदा के वक्त जननेता केवल बयानबाजी तक सीमित रह जाते हैं और पीड़ितों को तड़पने के लिए छोड़ दिया जाता है।
डॉ. सैकिया ने बाढ़ प्रभावितों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि लोगों को बिना किसी बहकावे में आए, एकजुट होकर अपने जीवन और हक के अधिकार के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठानी होगी। उन्होंने असम सरकार से पुरजोर मांग की है कि पीड़ितों को महज कुछ दिनों के अस्थाई राहत शिविरों या सूखी सामग्री के भरोसे न छोड़ा जाए, बल्कि विस्थापित परिवारों को स्थायी जमीन, सुरक्षित आवास और सम्मानजनक पुनर्वास की पक्की व्यवस्था दी जाए। उन्होंने कहा कि हर साल केवल राहत बांटने का नाटक करने के बजाय सरकार को नदी कटान रोकने के लिए वैज्ञानिक व स्थायी उपाय करने होंगे, ताकि लाखों लोगों को इस मानवीय त्रासदी से हमेशा के लिए निजात मिल सके।






