असम, गुवाहाटी : केंद्र सरकार पूर्वोत्तर देश की जीवनरेखा मानी जाने वाली ब्रह्मपुत्र को एक बड़े और बहु-कार्यात्मक आर्थिक गलियारे में बदलने के लिए बेहद गंभीर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत इस विशाल नदी को केवल एक जलस्रोत न मानकर परिवहन, व्यापार, पर्यटन और कुशल नदी प्रबंधन के एक एकीकृत माध्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी सिलसिले में आज केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल की अध्यक्षता में ब्रह्मपुत्र बोर्ड की उच्च अधिकार प्राप्त समीक्षा बोर्ड (एचपीआरबी) की बैठक आयोजित की गई, जिसमें पूर्वोत्तर के विकास को लेकर कई बड़े फैसलों पर चर्चा हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी और पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्यों के मंत्रियों व तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य फोकस वैज्ञानिक नदी बेसिन योजना को मजबूत करने, बाढ़ पर प्रभावी नियंत्रण पाने और पूर्वोत्तर में जल संसाधनों के सही इस्तेमाल पर रहा। इस दौरान जीआईएस, लिडार और हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया। सोनोवाल ने इस मौके पर कहा कि ब्रह्मपुत्र पूरे पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को गति देने वाली एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति है। राष्ट्रीय जलमार्ग 2 के रूप में घोषित इस नदी की असली ताकत को उजागर करने के लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) लगातार काम कर रहा है। यह जलमार्ग भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग के जरिए असम और बाकी पूर्वोत्तर को कोलकाता तथा हल्दिया बंदरगाहों से जोड़ता है, जिससे व्यापार का एक बेहद सस्ता और पर्यावरण-अनुकूल जरिया फिर से जीवंत हो उठा है। उन्होंने कहा कि यह रणनीति केंद्र सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को मजबूत करने में एक अहम रणनीतिक हथियार साबित होगी। बुनियादी ढांचे की बात करते हुए उन्होंने कहा कि असम ने करीब 1,751 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी कर ली हैं, जिनके तहत पांडु, धुबरी और जोगीघोपा में मुख्य टर्मिनल और फ्लोटिंग जेट्टियां तैयार की गई हैं। इसके अलावा 1,100 करोड़ रुपये से ज्यादा के काम अभी चल रहे हैं, जिनमें जहाजों की मरम्मत के केंद्र, नौगम्य मार्ग का विकास और डिब्रूगढ़ में एक क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र बनाना शामिल है। केंद्र सरकार आने वाले समय के लिए पूर्वोत्तर में लगभग 4,800 करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं पर भी विचार कर रही है, जिससे नदी किनारे के इलाकों में लॉजिस्टिक्स बेहतर होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार की इन नीतियों का असर आंकड़ों में भी साफ दिखता है। साल 2014 में जहां देश के राष्ट्रीय जलमार्गों पर सिर्फ 18 मिलियन मीट्रिक टन माल की आवाजाही होती थी, वहीं साल 2025-26 में यह बढ़कर 218 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक हो गई है। भविष्य में इस क्षेत्र में 79 नई सामुदायिक जेट्टियां बनाने, रणनीतिक नदी बंदरगाहों पर कस्टम और इमिग्रेशन की सुविधाएं शुरू करने तथा असम में आधुनिक शहरी जल परिवहन और क्रूज टर्मिनल चलाने की योजना है। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रह्मपुत्र नदी में अत्यधिक गाद, लगातार बदलते मार्ग और हर साल आने वाली बाढ़ जैसी बड़ी तकनीकी चुनौतियां हैं। इनसे निपटने के लिए एक बेहद वैज्ञानिक और एकीकृत नदी बेसिन प्रबंधन दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है ताकि पारिस्थितिक संतुलन को नुकसान पहुंचाए बिना इस पूरे क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार एक ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर बनाया जा सके। इस बैठक में पर्यटन मंत्री अजंता नेउग, अरुणाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री बियुराम वाहगे, मणिपुर के पर्यटन मंत्री खुरैजम लोकेन सिंह, मेघालय के जल संसाधन मंत्री मेतबाह लिंगदोह, मिजोरम के आईडब्ल्यूआरडी मंत्री पी.सी. वनलालरुआता, सिक्किम के पीएचई मंत्री सोनम लामा और त्रिपुरा की उद्योग मंत्री संताना चकमा सहित ब्रह्मपुत्र बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. रणबीर सिंह और विभिन्न सलाहकार उपस्थित रहे।
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