मिजोरम, आइजोल : भारत के चकमा नेताओं के एक समूह ने केंद्र सरकार से बांग्लादेश को दी जाने वाली डीजल और बिजली की आपूर्ति तुरंत निलंबित करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 1947 के विभाजन के समय चटगाँव पहाड़ी क्षेत्र (सीएचटी) को पाकिस्तान में शामिल करने के निर्णय को ऐतिहासिक भूल बताते हुए इसे सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
एक बयान में चकमा नेताओं ने कहा कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की ओर से भारत यात्रा के लिए रखी गई शर्तें पूरी तरह अनुचित हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, अन्य कथित भगोड़ों और शरीफ उस्मान हादी की हत्या के आरोपियों के प्रत्यर्पण को भारत यात्रा से जोड़ने की शर्त को भारत का अपमान करार दिया। नेताओं ने ‘भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन’ के तहत सालाना 1,80,000 मीट्रिक टन डीजल आपूर्ति के समझौते को निलंबित करने की मांग करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भी भारत ने मार्च और अप्रैल में बांग्लादेश को 30,000 टन से अधिक डीजल भेजा था।
इसके साथ ही नेताओं ने झारखंड स्थित अदाणी गोड्डा कोयला आधारित संयंत्र से बांग्लादेश को होने वाले बिजली निर्यात को रोकने की अपील की है। उन्होंने सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच बिजली आपूर्ति बढ़कर लगभग 2.25 अरब किलोवाट-घंटे होने का हवाला देते हुए कहा कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के मद्देनजर इस फैसले की समीक्षा करनी चाहिए।
विभाजन का जिक्र करते हुए चकमा नेताओं ने कहा कि गैर-मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के बावजूद चटगाँव पहाड़ी क्षेत्र को 1947 में पाकिस्तान को सौंप दिया गया था, जबकि वहां के मूल निवासी भारत में शामिल होना चाहते थे और उन्होंने 15 अगस्त 1947 को रांगामाटी में भारतीय राष्ट्रध्वज भी फहराया था। यह संयुक्त बयान चकमा स्वायत्त जिला परिषद के विधायक रसिक मोहन चकमा, ह्यूमैनिटी प्रोटेक्शन फोरम के अध्यक्ष गौतम चकमा, चकमा हजोंग एल्डर्स फोरम के प्रीतिमय चकमा और चकमा डेवलपमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक सुहास चकमा द्वारा जारी किया गया है।






