अरुणाचल प्रदेश, ऊपरी सुबनसिरी : अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले स्थित ताकसिंग चक्र में भारतीय सेना और चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच आमने-सामने की झड़प के नए दावे सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर 26 जुलाई के टाइमस्टैम्प वाले कथित फोटो और वीडियो वायरल होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्र में चीनी गतिविधियों को लेकर अटकलें तेज़ हो गई हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह गतिरोध 25 जुलाई को शुरू हुआ हो सकता है, हालांकि इस घटना की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह विवाद ताकसिंग, माज़ा, गलेमु, पोतरांग झील, तामा चूचू, गालेन सिन्यिक और श्रीचू घाटी जैसे असाफिला के पास स्थित क्षेत्रों में हाल ही में सामने आई चीनी गतिविधियों के बाद उभरा है, जहाँ नाह वेलफेयर सोसाइटी ने चीन द्वारा ग्रामीणों की पारंपरिक चरागाह भूमि पर सड़कों, पुलों और सैन्य शिविरों के निर्माण का आरोप लगाया था।इसके विपरीत भारतीय सेना और अरुणाचल प्रदेश के गृह मंत्री मामा नातुंग ने नए चीनी अतिक्रमण के दावों को सिरे से खारिज करते हुए अफवाह करार दिया है। हाल ही में प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पीईबी) की फैक्ट चेक इकाई ने भी चीनी सेना के 60 किलोमीटर अंदर तक घुस आने का दावा करने वाले वायरल वीडियो को पुराना और भ्रामक बताकर खारिज कर दिया था। इसके बावजूद नए विजुअल्स के सामने आने से स्थानीय निवासियों और नेताओं की चिंताएं बनी हुई हैं, क्योंकि वे इन्हें आधिकारिक बयानों के विपरीत मान रहे हैं।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कामले जिले के जननेता अजय मुर्तेम ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रभावित क्षेत्रों के जमीनी मूल्यांकन की मांग की है। उन्होंने गृह मंत्रालय, भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के साथ मिलकर पारदर्शी सत्यापन कराने, भ्रामक जानकारियों को दूर करने के लिए आधिकारिक बयान जारी करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में गश्त व सुरक्षा तंत्र मजबूत करने का आग्रह किया है। फिलहाल अधिकारियों की ओर से इन वायरल विजुअल्स की सत्यता और झड़प के दावों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
वायरल विजुअल्स ने फिर बढ़ाई सीमावर्ती इलाकों की चिंता
अरुणाचल प्रदेश, ऊपरी सुबनसिरी : अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले स्थित ताकसिंग चक्र में भारतीय सेना और चीनी पीपुल्स...
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