कर्नाटक, बंगलूरू : कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर मतदाता सूची को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू की जा रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बंगलूरू में पत्रकारों से औपचारिक बातचीत करते हुए उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति (एससी), पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटना है। शिवकुमार ने इस बात पर जोर दिया कि ये वर्ग हमेशा से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं और कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर इन वंचित और पिछड़े वर्गों के वोटों तथा उनके संवैधानिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ नहीं होने देगी।उपमुख्यमंत्री ने मीडिया से बात करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस पूरे प्रशासनिक घटनाक्रम और इसके पीछे की रणनीतियों पर पूरी तरह से नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व को इस पूरी प्रक्रिया की गहराई से जानकारी है और संगठन के स्तर पर सभी नेताओं, विधायकों तथा जमीनी कार्यकर्ताओं को इसके प्रति सचेत और जागरूक किया जा रहा है। कांग्रेस अपने स्तर पर यह सुनिश्चित करने के लिए कमर कस चुकी है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से गायब न होने पाए। शिवकुमार ने इस मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए कहा कि यह केवल कांग्रेस का ही मुद्दा नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की निष्पक्षता से जुड़ा मामला है।बयान के में उपमुख्यमंत्री ने राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर अन्य दलों को भी इस ओर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस को भी अपने-अपने समर्थकों और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए आगे आना चाहिए। शिवकुमार के इस विस्तृत और आक्रामक रुख से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में कर्नाटक के भीतर मतदाता सूची के पुनरीक्षण का यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों से लेकर जमीनी स्तर तक एक बड़ा विवाद बन सकता है, जहां कांग्रेस खुद को शोषित और अल्पसंख्यक समुदायों के सबसे बड़े रक्षक के रूप में पेश करने की रणनीति पर काम कर रही है।
उपमुख्यमंत्री ने एसआईआर पर उठाए सवाल
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