सिक्किम, गंगटोक : सिक्किम उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में लागू किए गए विषम-सम वाहन आवागमन नियम को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) को स्वीकार कर लिया है। यह जनहित याचिका सिटीजन एक्शन पार्टी-सिक्किम (सीएपी) के प्रवक्ता महेश राय द्वारा दायर की गई है, जिसमें इस नियम के कारण आम जनता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों और उनकी व्यावहारिक समस्याओं पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया और राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया कि वे तीन दिनों के भीतर सार्वजनिक सूचना जारी करें। इसके साथ ही जिला प्रशासनों को इस प्रतिबंधात्मक नियम से प्रभावित होने वाले नागरिकों की शिकायतों, आपत्तियों और चिंताओं को व्यापक रूप से एकत्रित कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र ही न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।अदालत ने नागरिकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को भी यह स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह इस प्रतिबंधात्मक व्यवस्था के दौरान निवासियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए शुरू किए गए विशिष्ट सार्वजनिक परिवहन उपायों, अतिरिक्त बसों की व्यवस्था और अन्य वैकल्पिक प्रबंधों का पूरा लेखा-जोखा रिकॉर्ड पर रखे। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने राजधानी और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में यातायात के बढ़ते दबाव और सुचारू आवागमन प्रबंधन के नाम पर इस विषम-सम नियम को लागू किया था। हालांकि, जमीन पर इस नीति की जनता के कई वर्गों, व्यापारियों और दैनिक यात्रियों द्वारा तीखी आलोचना की जा रही है, जिन्होंने रोजमर्रा के काम-काज में होने वाली भारी असुविधा और पहुंच संबंधी चिंताओं को लेकर लगातार अपनी आवाज उठाई है। इस बेहद संवेदनशील और जनहित से जुड़े मामले की अगली सुनवाई आगामी 9 जून को होनी तय हुई है, जब अदालत जिला प्रशासन द्वारा सौंपी गई जन-शिकायतों की रिपोर्ट और राज्य सरकार के जवाब की विस्तृत समीक्षा करने के बाद आगे का फैसला सुनाएगी।
पार्टी विरोधी सोशल मीडिया पोस्ट करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
त्रिपुरा, अगरतला : त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं और कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया...
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