नई दिल्ली : ग्लोबल सिक्योरिटी और रक्षा मामलों पर नजर रखने वाली अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा जारी की गईं हालिया सैटेलाइट तस्वीरों ने वैश्विक स्तर पर एक बड़ी हलचल पैदा कर दी है। इन खुफिया और उच्च क्षमता वाली सैटेलाइट तस्वीरों से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि चीन अपने बेहद संवेदनशील परमाणु ठिकानों के आसपास अभूतपूर्व स्तर पर सैन्य बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग प्रशासन चुपचाप अपने परमाणु परीक्षण और अनुसंधान केंद्रों के इर्द-गिर्द बड़े पैमाने पर निर्माण कार्यों में जुटा है, जो न केवल वैश्विक रणनीतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र समेत पूरी दुनिया के लिए एक नया सुरक्षा संकट भी खड़ा कर सकता है। तस्वीरों के बारीक विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल नियमित रखरखाव या मामूली अपग्रेडेशन का मामला नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी और दीर्घकालिक सैन्य रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत परमाणु हथियारों की तैनाती, भंडारण और उनके परीक्षण की क्षमताओं को कई गुना बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।सैटेलाइट से प्राप्त इन संवेदनशील चित्रों में परमाणु बेस के चारों ओर नई और बेहद मजबूत कंक्रीट की भूमिगत सुरंगों, मिसाइल साइलो और भारी सैन्य वाहनों के लिए चौड़ी सड़कों का जाल बिछाया जाता साफ देखा जा सकता है। इसके अलावा, इस प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर कई नए प्रशासनिक भवनों, तकनीकी प्रयोगशालाओं और सुरक्षा बंकरों का निर्माण भी हाल के महीनों में बहुत तेजी से हुआ है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इन ठिकानों के पास उन्नत रडार प्रणालियों और वायु रक्षा मिसाइल तंत्र की मौजूदगी भी दर्ज की गई है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि चीन इस पूरे इलाके को किसी भी बाहरी हमले या जासूसी से पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए एक अभेद्य किला बना रहा है। रणनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि जिस रफ्तार और गोपनीयता के साथ इन सुदूर इलाकों में भारी मशीनरी और निर्माण सामग्री पहुंचाई जा रही है, उससे साफ है कि चीन अपनी परमाणु त्रिमूर्ति को और अधिक आक्रामक और मारक बनाने की दिशा में काम कर रहा है।चीन की इस आक्रामक सैन्य तैयारी और बुनियादी ढांचे के विस्तार ने वैश्विक महाशक्तियों के साथ-साथ उसके पड़ोसी देशों की भी नींद उड़ा दी है। रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि चीन इन नए ठिकानों के जरिए अपनी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या में भारी इजाफा करने और उन्हें तुरंत दागने की स्थिति में रखने की क्षमता हासिल करना चाहता है। अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पहले से ही चीन की परमाणु गोपनीयता को लेकर सवाल उठते रहे हैं और अब इन ताजा सबूतों के सामने आने के बाद यह अंदेशा और गहरा हो गया है कि वह दुनिया से छिपाकर किसी बड़े परमाणु कार्यक्रम या नए प्रकार के हथियारों के परीक्षण की गुप्त योजना पर काम कर रहा है। यह पूरी स्थिति आने वाले समय में एक नई परमाणु हथियारों की होड़ को जन्म दे सकती है, जिससे न केवल क्षेत्रीय शांति खतरे में पड़ेगी बल्कि वैश्विक कूटनीतिक संबंधों में भी भारी तनाव पैदा होना तय है।
पार्टी विरोधी सोशल मीडिया पोस्ट करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
त्रिपुरा, अगरतला : त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं और कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया...
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