महाराष्ट्र, मुंबई : भारतीय संगीत जगत के लिए यह बेहद दुखद और अपूरणीय क्षति है। सुरों की मल्लिका और अपनी जादुई आवाज से कई दशकों तक श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाली दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर अब हमारे बीच नहीं रहीं। 89 वर्ष की आयु में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन की खबर से संगीत उद्योग, उनके प्रशंसकों और पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। उन्होंने भारतीय संगीत को जो योगदान दिया है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।सुमन कल्याणपुर का नाम आते ही एक ऐसी सुरीली और पवित्र आवाज का अहसास होता है जिसने कई पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया। 1950 और 1960 के दशक में जब भारतीय सिनेमा का स्वर्ण युग चल रहा था, तब सुमन ने अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी आवाज में एक ऐसी सादगी, गहराई और मधुरता थी जो सीधे सुनने वाले के दिल में उतर जाती थी। उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली, गुजराती, असमिया और भोजपुरी सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा और हर भाषा के श्रोताओं को अपना दीवाना बनाया।सिनेमा और संगीत की दुनिया में उनका सफर साल 1954 में शुरू हुआ था। उन्होंने मराठी फिल्म शुक्रची चांदनी और हिंदी फिल्म मंगू से अपने पार्श्व गायन करियर की शुरुआत की। मंगू फिल्म में उनका गाया गाना कोई पुकारे धीरे से तुझे संगीत प्रेमियों के बीच आज भी बेहद लोकप्रिय है। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने मोहम्मद रफी, मुकेश, मन्ना डे और हेमंत कुमार जैसे उस दौर के सभी दिग्गज गायकों के साथ एक से बढ़कर एक सदाबहार युगल गीत गाए। मोहम्मद रफी साहब के साथ गाए उनके गीत जैसे आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे और ठहरिए होश में आ लूं आज भी गुनगुनाए जाते हैं।कई बार उनकी आवाज की तुलना सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर से भी की जाती थी, लेकिन सुमन ने अपनी कड़ी मेहनत, बेमिसाल प्रतिभा और अनूठी गायन शैली के दम पर हमेशा खुद को एक स्वतंत्र और महान कलाकार के रूप में स्थापित रखा। उनकी बहुमुखी प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने शास्त्रीय बंदिशों से लेकर रोमांटिक गानों, भजनों और गज़लों तक को बेहद खूबसूरती से निभाया। उनके गाए भजन मन रे तू काहे ना धीर धरे (फिल्म: चित्रलेखा) में उनकी आवाज की जो गहराई दिखती है, वह अमर है।संगीत में उनके इसी अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण सहित कई बड़े पुरस्कारों से नवाजा गया था। सुमन कल्याणपुर का निधन संगीत के एक सुनहरे अध्याय का अंत है। भले ही वे शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपनी मधुर आवाज, सदाबहार गानों और कला के रूप में वे हमेशा अमर रहेंगी और आने वाली कई पीढ़ियों को संगीत की प्रेरणा देती रहेंगी।
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