नई दिल्ली : राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद इससे जुड़े पुराने जमीन विवाद फिर से चर्चा में आ गए हैं। इस संबंध में जमीन खरीद-फरोख्त के आरोपों की जांच के लिए पांच साल पहले राधेश्याम मिश्रा कमेटी का गठन किया गया था, लेकिन इसकी रिपोर्ट आज तक सामने नहीं आ सकी है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने वर्ष 2020 में कई जमीनें खरीदी थीं, जिनमें से कुछ सौदों पर गंभीर आरोप लगे थे। इनमें एक मामला दो करोड़ रुपये की जमीन को महज पांच मिनट के भीतर न्यास को 18 करोड़ रुपये में बेचने का था, जबकि दूसरे मामले में 20 लाख रुपये की जमीन ढाई करोड़ रुपये में खरीदी गई थी। इन विवादों के बढ़ने पर शासन ने तथ्यों को सामने लाने के लिए राधेश्याम मिश्रा जांच कमेटी बनाई थी और एक जनहित याचिका के दौरान सरकार ने अदालत को बताया था कि कमेटी मामले की जांच कर रही है। अदालत ने कमेटी को एक से दो हफ्ते का समय दिया था, लेकिन यह जांच कभी पूरी नहीं हुई और याचिका खारिज होने के बाद मामला दबा रह गया। अब सूत्रों के अनुसार इस पूरे प्रकरण को विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी जांच में शामिल कर लिया है।चढ़ावा चोरी के ताजा मामले के बाद जमीन के इन पुराने सौदों को लेकर राजनीतिक और कानूनी दबाव एक बार फिर बढ़ गया है। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस सिलसिले में एसआईटी के अध्यक्ष विजय विश्वास पंत और सदस्य नील रतन से मुलाकात की और उन्हें 11 महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंपे। उन्होंने दावा किया कि मंदिर के लिए जमीनें बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गईं, जिससे चंदे की रकम को भारी नुकसान पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि चढ़ावे की अनियमितताओं में शामिल लोगों की भूमिका इन जमीन सौदों में भी रही है, इसलिए इसकी गहन जांच होनी चाहिए। सौंपे गए दस्तावेजों के आधार पर एसआईटी ने अब विस्तृत जांच शुरू कर दी है, जिसमें एक प्रमुख सौदा 18 मार्च 2021 का है, जहां दो करोड़ रुपये की जमीन साढ़े 18 करोड़ रुपये में ट्रस्ट को बेची गई थी। इस अकेले सौदे में करीब साढ़े 16 करोड़ रुपये का अंतर पाया गया है और इस बैनामे में तत्कालीन मेयर ऋषिकेश उपाध्याय और न्यास के सदस्य अनिल मिश्रा गवाह के रूप में शामिल थे।
मृतकों की संख्या 235 तक पहुंची
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