असम, गुवाहाटी : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी ने बायो-मेथनॉल उत्पादन तकनीक के बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग के लिए हैदराबाद की काश्यप क्लीनटेक इनोवेशंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस तकनीक को आईआईटी गुवाहाटी के बायोसाइंसेज और बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर देबाशीष दास और पीएचडी स्कॉलर कृष्णा कल्याणी साहू ने विकसित किया है। यह एक दो-चरणीय जैविक प्रक्रिया है, जिसमें कीमोऑटोट्रॉफिक बैक्टीरिया को बायोकैटलिस्ट के रूप में इस्तेमाल करके मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड को बायो-मेथनॉल में बदला जाता है। पारंपरिक रासायनिक तरीके बहुत महंगे होते हैं, उनमें ऊर्जा की खपत ज्यादा होती है और साथ ही टॉक्सिक बाय-प्रोडक्ट्स भी निकलते हैं, लेकिन इस नई तकनीक में किसी भी रासायनिक उत्प्रेरक की जरूरत नहीं होती और यह सामान्य परिस्थितियों में काम करती है, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल और सस्ती साबित होती है।इंजन टेस्टिंग के दौरान इस बायो-मेथनॉल के बेहद शानदार परिणाम सामने आए हैं। जब इसका उपयोग फोर-स्ट्रोक डीजल इंजन में डीजल के साथ ब्लेंडेड ईंधन के रूप में किया गया, तो इसने एमिशन को 87 प्रतिशत तक कम कर दिया। सबसे खास बात यह रही कि इस मिश्रित ईंधन ने ईंधन की खपत, ऊर्जा दक्षता और इंजन के समग्र प्रदर्शन के मामले में सामान्य डीजल को भी पीछे छोड़ दिया, जबकि इंजन की यांत्रिक दक्षता भी बनी रही। ईंधन के रूप में इसके उपयोग के अलावा बायो-मेथनॉल एक मूल्यवान औद्योगिक कच्चा माल भी है, जो फॉर्मलाडेहाइड, एसिटिक एसिड और अन्य उच्च मूल्य वाले रसायनों के निर्माण में मदद करता है। यह दोहरा उपयोग इस तकनीक की व्यावसायिक उपयोगिता को काफी मजबूत बनाता है।भारतीय उद्योगों के लिए भी इसके गहरे मायने हैं। स्टील, सीमेंट और इथेनॉल निर्माण जैसे क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन कम करना सबसे मुश्किल काम माना जाता है। ऐसे में यह तकनीक कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) फ्रेमवर्क के साथ पूरी तरह फिट बैठती है, जिससे ये उद्योग कचरे के रूप में निकलने वाली गैसों से उपयोगी ईंधन बनाकर अपना कार्बन फुटप्रिंट काफी हद तक कम कर सकते हैं।
आईआईटी गुवाहाटी ने किया बायो-मेथनॉल तकनीक के व्यावसायिक उपयोग के लिए समझौता
असम, गुवाहाटी : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी ने बायो-मेथनॉल उत्पादन तकनीक के बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग के लिए...
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