मणिपुर, इम्फाल : कुकी सिविल सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशंस की वर्किंग कमेटी (उखरुल) ने कुकी-जो बहुल इलाकों में भेजी जा रही जरूरी राशन और राहत सामग्री की जब्ती व आगजनी को रोकने के लिए इम्फाल ईस्ट, कांगपोकपी और उखरुल जिला प्रशासन को 24 घंटे की समयसीमा दी है। समिति ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन इस मामले में तुरंत कड़ा हस्तक्षेप नहीं करता है, तो 23 जुलाई की मध्यरात्रि से तीन दिनों की जवाबी आर्थिक नाकेबंदी लागू कर दी जाएगी। संगठन का आरोप है कि उखरुल के उपायुक्त द्वारा 25 जून को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में दिए गए आश्वासनों के बावजूद वंघोन, साईजांग और सोकवाओ जैसे इलाकों में वाहनों को रोकने, सामान जलाने और ड्राइवरों को धमकाने की घटनाएँ बेरोक-टोक जारी हैं, जिससे क्षेत्र में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति ठप्प हो गई है।समिति ने राज्य और केंद्र सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि सेनापति और कांगलाटोंगबी में राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर नागा और मैतेई समूहों द्वारा पिछले एक महीने से जारी नाकेबंदी को हटाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। संगठन के अनुसार एक तरफ जहाँ कुकी-जो समुदाय ने सैकड़ों अन्य वाहनों को सुरक्षित रास्ता दिया है, वहीं उनके आम नागरिकों के लिए भेजी जा रही राहत सामग्री को रोककर अब तक लगभग 10 लाख रुपये के सामान को नष्ट कर दिया गया है। कुकी संगठन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मौजूदा संघर्ष के दौरान अब तक काफी संयम बरता है, लेकिन इसे उनकी कमजोरी न समझा जाए। यदि प्रशासन अगले 24 घंटों में रसद की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने में विफल रहता है, तो प्रस्तावित तीन दिवसीय नाकेबंदी से उत्पन्न होने वाले किसी भी हालात की पूरी जवाबदेही संबंधित अधिकारियों की होगी।
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