असम, गुवाहाटी : गुवाहाटी में गायक जुबिन गर्ग के एक भित्तिचित्र को दोबारा पेंट करने के दौरान शुरू हुआ विवाद अब असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के एक बयान के बाद बड़े राजनीतिक और कानूनी विवाद में बदल गया है। यह मामला तब शुरू हुआ जब गुवाहाटी के एक फ्लाईओवर पर जुबिन गर्ग के बने भित्तिचित्र को सौंदर्यीकरण अभियान के दौरान कुछ कर्मचारियों ने गलती से आंशिक रूप से मिटा दिया। जनता के आक्रोश के बाद इस चित्र को दोबारा बनाया गया, लेकिन मुख्यमंत्री इस नए रूप से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने कहा कि यह नया चित्र जुबिन गर्ग जैसा कम और अर्जेंटीना के क्रांतिकारी चे ग्वेरा जैसा ज्यादा दिख रहा है। मुख्यमंत्री ने आगे सवाल उठाया कि असम की दीवारों पर चे ग्वेरा का चेहरा क्यों होना चाहिए, जिनका राज्य से कोई संबंध नहीं है। इसके विकल्प के रूप में उन्होंने टिप्पणी की कि अगर कलाकारों को किसी स्थानीय क्रांतिकारी का चित्र बनाना ही है, तो उन्हें चे ग्वेरा के बजाय परेश बरुआ का चित्र बनाना चाहिए।परेश बरुआ का नाम इस तरह लिया जाना बेहद संवेदनशील है, क्योंकि वह भारत में गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएएपीए) के तहत प्रतिबंधित संगठन उल्फा-आई के कमांडर-इन-चीफ हैं। उनका संगठन असम को भारत से अलग करने की सशस्त्र मांग करता रहा है और उन्होंने साल 2023 के शांति समझौते को भी खारिज कर दिया था। ऐसे में एक मुख्यमंत्री द्वारा उनका नाम लिए जाने पर कानूनी विशेषज्ञों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सुप्रीम कोर्ट के वकील उपमन्यु हजारीका का कहना है कि परेश बरुआ की तुलना चे ग्वेरा से करना उन्हें एक क्रांतिकारी का दर्जा देने जैसा है, जो एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की जिम्मेदारी के अनुकूल नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि इसी असम में साल 2022 में पुलिस ने एक 19 वर्षीय छात्रा बरशश्री बुरागोहाईं को एक कथित उल्फा समर्थक कविता लिखने के आरोप में यूएएपीए के तहत गिरफ्तार कर लिया था, जबकि खुद मुख्यमंत्री सार्वजनिक मंच से ऐसा बयान दे रहे हैं। वही, राष्ट्रीय स्तर के असम के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और चिंतक डॉ. दिव्यज्योति सैकिया ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा उल्फा के सेना प्रमुख परेश बरुआ को ‘विप्लवी वीर’ कहे जाने पर गहरा रोष और चिंता व्यक्त की है। डॉ. सैकिया का कहना है कि भारत देश का विरोध करके लंबे समय से विदेशों में शरण लिए हुए और देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने वाले एक प्रतिबंधित संगठन के नेता को मुख्यमंत्री द्वारा इस तरह ‘वीर’ की उपाधि देना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के इस बयान को देश के गृह विभाग और सुरक्षा तंत्र को एक खुली चुनौती करार दिया है। डॉ. सैकिया ने स्पष्ट किया कि संप्रभुता के खिलाफ हथियार उठाने वाले व्यक्ति को सम्मानित लहजे में संबोधित करना देश की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए एक बेहद गलत और खतरनाक संदेश है।इस चौतरफा विवाद पर मुख्यमंत्री ने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा है कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की उल्फा के खिलाफ जीरो-टोलरेंस की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है और उनका इरादा किसी को परेश बरुआ का चित्र बनाने की अनुमति देना बिल्कुल नहीं था। उन्होंने कहा कि उनका मतलब सिर्फ इतना था कि असम के लोग परेश बरुआ को जानते हैं, लेकिन क्यूबा के किसी व्यक्ति को नहीं जानते। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि यदि कोई भी परेश बरुआ का भित्तिचित्र बनाएगा, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि आलोचकों का मानना है कि शांति वार्ता के लिए पर्दे के पीछे बातचीत करना एक अलग प्रक्रिया है, लेकिन सार्वजनिक रूप से दीवारों पर चित्र बनाने के संदर्भ में उनका नाम लेकर मुख्यमंत्री ने खुद एक अनावश्यक विवाद को जन्म दे दिया है।
जुबिन गर्ग भित्तिचित्र विवाद मुख्यमंत्री के परेश बरुआ वाले बयान पर मचा राजनीतिक और कानूनी घमासान
असम, गुवाहाटी : गुवाहाटी में गायक जुबिन गर्ग के एक भित्तिचित्र को दोबारा पेंट करने के दौरान शुरू हुआ विवाद...
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