तमिलनाडु, चेन्नई : केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने चेन्नई में एक पूर्व वरिष्ठ बैंक अधिकारी और एक निजी कंपनी के प्रमुख को बैंक धोखाधड़ी मामले में सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को आवास कर्ज की धोखाधड़ीपूर्ण स्वीकृति और वितरण के कारण 5.29 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था। अदालत ने इस मामले के संबंध में निजी कंपनी पर जुर्माना भी लगाया। सोमवार को अदालत ने चेन्नई स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ट्रिप्लिकेन शाखा के तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक दीपक वी मेनन को दोषी ठहराया। इसके साथ ही उन्हें सात साल के कठोर कारावास के साथ 65,000 रुपये का जुर्माना भी सुनाया। अदालत ने श्री शास्त्रु एसोसिएट्स कदनथेट्टी प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य प्रबंध निदेशक बी. शिवगनेसन को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और उन पर 1.17 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। कंपनी पर भी इस मामले में 26,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के बाद सीबीआई ने 29 अप्रैल, 2009 को यह मामला दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 2006 और 2007 के बीच जाली और मनगढ़ंत दस्तावेजों के आधार पर 28 आवास कर्ज धोखाधड़ी से स्वीकृत और वितरित किए गए थे। जांच के दौरान, सीबीआई ने पाया कि धोखाधड़ी वाले लेन-देन के परिणामस्वरूप फरवरी 2010 तक 5.29 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि जमा हो गई थी। जांच पूरी करने के बाद, एजेंसी ने 30 जून, 2010 को बैंक अधिकारी मेनन, शिवगनेसन, कंपनी और एक निजी व्यक्ति एस वैद्यनाथन सहित चार आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। वहीं, मुकदमे की सुनवाई के दौरान वैद्यनाथन की मृत्यु हो गई और उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई। सबूतों की जांच करने और दलीलें सुनने के बाद, सीबीआई की विशेष अदालत ने शेष आरोपियों को दोषी पाया और उन्हें सजा सुनाई। 2024 में इसी तरह के एक मामले में, सीबीआई ने 4.66 करोड़ रुपये के इंडियन बैंक होम लोन धोखाधड़ी मामले के संबंध में चेन्नई में फरार आरोपी एम नागा कुमार उर्फ तमिल सेल्वन को गिरफ्तार किया था।
आईएसएम 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ के बजट को मंजूरी
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