सिक्किम, गंगटोक : सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामांग ने राज्य के 51वें स्थापना दिवस के अवसर पर कहा कि हिमालयी राज्य अब विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां गुणवत्ता, स्थिरता, युवा सशक्तिकरण और दीर्घकालिक आर्थिक विकास पर मुख्य रूप से ध्यान दिया जाएगा। स्थापना दिवस पर दुनिया भर में रह रहे सिक्किम के लोगों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने एक विस्तृत सार्वजनिक संदेश जारी किया। उन्होंने इस दिन को हर सिक्किमी के लिए अत्यधिक गर्व, आभार और उत्सव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच दशकों में सिक्किम पूरे देश के लिए शांति, सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और समावेशी विकास के एक बेहतरीन मॉडल के रूप में उभरा है।अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने सिक्किम के स्वर्ण जयंती वर्ष के समापन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया दौरे का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह दौरा 1975 में भारत के साथ विलय के बाद से राज्य की विकास यात्रा को मिली राष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है। इस दौरे के दौरान राज्य में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन या घोषणा की गई। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रधानमंत्री ने सिक्किम को पूर्व का स्वर्ग बताते हुए सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, स्वच्छता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के क्षेत्र में राज्य के प्रयासों की जमकर सराहना की है।तामांग ने स्पष्ट किया कि सिक्किम के विकास का अगला चरण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार, खेल, उद्यमिता और बुनियादी ढांचे में गुणवत्ता सुधार लाने के साथ-साथ युवाओं के लिए बेहतर अवसर पैदा करने पर केंद्रित होगा। सरकार खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसी योजनाओं के जरिए खेल बुनियादी ढांचे और युवा विकास में भारी निवेश कर रही है। इसके तहत पलजोर स्टेडियम में राज्य खेल अकादमी को पुनर्जीवित किया गया है, जबकि तरुणदीप राय तीरंदाजी अकादमी और ओलिंपियन जस लाल प्रधान के नाम पर एक बॉक्सिंग अकादमी बनाने की योजना पर काम चल रहा है। इसके अलावा, एक भव्य स्वर्ण जयंती खेल और सांस्कृतिक परिसर भी विकसित किया जा रहा है, जिसमें फुटबॉल स्टेडियम, इंडोर स्टेडियम और एक हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग सेंटर शामिल होगा।रोजगार और कौशल विकास के मोर्चे पर जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पीएमकेवीवाई और डीडीयू-जीकेवाई जैसे कार्यक्रमों के तहत 13,500 से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें से 11,000 से अधिक युवाओं को नौकरियां मिल चुकी हैं। सरकार मुख्यमंत्री-एलीवेट योजना और विदेशी भाषा प्रशिक्षण पहलों के माध्यम से विदेशों में भी रोजगार के अवसर बढ़ा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युवाओं को भेजने के प्रयासों की एक बड़ी सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि हाल ही में 13 प्रशिक्षित नर्सों को जर्मनी में रोजगार मिला है। इसके साथ ही राज्य में एमएसएमई और स्टार्टअप का दायरा भी तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2019 में जहां पंजीकृत एमएसएमई इकाइयों की संख्या लगभग 250 थी, वहीं साल 2026 में यह बढ़कर 35,000 से अधिक हो गई है। ये योजनाएं युवा उद्यमियों और ग्रामीण उद्यमों को सशक्त बनाकर स्वरोजगार के नए रास्ते खोल रही हैं।
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